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'जेल में जफर अली की जान को खतरा, खूंखार अपराधी जैसा व्यवहार', संभल जामा मस्जिद कमेटी के सदर की गिरफ्तारी पर परिवार का आरोप

संभल की शाही जामा मस्जिद प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जफर अली को हिंसा मामले में गिरफ्तार किया गया है. इस बीच जफर अली के परिवार ने आरोप लगाया है कि उनकी जान को खतरा है और जेल अधिकारी उन्हें उनसे मिलने नहीं दे रहे हैं. जफर के परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें उनकी दवाइयां भी नहीं दी जा रही हैं. 

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संभल जामा मस्जिद के सदर जफर अली अरेस्ट
संभल जामा मस्जिद के सदर जफर अली अरेस्ट

यूपी के संभल जिले में नवंबर-2024 में हुई हिंसा के सिलसिले में शाही जामा मस्जिद प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जफर अली को गिरफ्तार किया गया है. फिलहाल, उन्हें मुरादाबाद जेल भेज दिया गया है. इस बीच जफर अली के परिवार ने आरोप लगाया है कि उनकी जान को खतरा है और जेल अधिकारी उन्हें उनसे मिलने नहीं दे रहे हैं. जफर अली के परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें उनकी दवाइयां भी नहीं दी जा रही हैं. 

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आपको बता दें कि शाही जामा मस्जिद प्रबंधन समिति के अध्यक्ष को संभल हिंसा के सिलसिले में रविवार को गिरफ्तार किया गया था. यह हिंसा शाही जामा मस्जिद के कोर्ट के आदेश पर किए गए सर्वेक्षण के दौरान हुई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे. यह मुगलकालीन मस्जिद एक बड़े विवाद के केंद्र में तब आई थी, जब एक याचिका में दावा किया गया था कि यह एक प्राचीन हिंदू मंदिर का स्थल है. 

बीते मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए जफर अली के बड़े भाई मोहम्मद ताहिर अली ने दावा किया कि परिवार के सदस्यों को जेल में उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई है. उन्होंने कहा, "उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, जैसे कि वह एक खूंखार अपराधी हों." ताहिर अली ने आगे आरोप लगाया कि जेल के अंदर जफर अली की जान को खतरा है. 

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बकौल ताहिर अली- "वह 70 साल के हैं और उन्हें दवाइयां भी नहीं मिल पा रही हैं. पुलिस दुर्व्यवहार कर रही है और प्रशासन ने सारी हदें पार कर दी हैं." उन्होंने यह भी दावा किया कि अली ने संभल हिंसा की जांच में प्रशासन के साथ पूरा सहयोग किया था, फिर भी उसे दंडित किया जा रहा है. 

उन्होंने अली की बिना शर्त रिहाई की मांग करते हुए कहा, "हमें अदालत पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि न्याय मिलेगा." ताहिर अली ने पहले आरोप लगाया था कि अली को तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग के समक्ष अपनी गवाही देने से रोकने के लिए गिरफ्तार किया गया था. अली ने पुलिस पर हिंसा के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया था और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि सिटी पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी और सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट वंदना मिश्रा इसके लिए जिम्मेदार हैं और मौतें पुलिस की गोलीबारी के कारण हुई हैं. 

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