उत्तर भारत में ठंड का प्रकोप जारी है. कोहरे और शीतलहर की वजह से इंसानों और जानवरों को ही नहीं बल्कि फसलों को भी नुकसान पहुंचता है.
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मौसम विभाग ने शीतलहर से फसलों को बचानें के लिए एडवाइजरी जारी की है, ताकि किसान इस मौसम से अपनी फसलों को बचा सकें.
फसलों को ठंड की चपेट से बचाने के लिए शाम के समय हल्की सिंचाई करें. किसान ऐसे मौसम में सिंचाई करने के लिए स्प्रींकलर का इस्तेमाल कर सकते हैं.
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पॉलिथीन शीट, बोरी या सरकंडे से नए फलों और सब्जियों को ढक दें. केले को ढकने के लिए छिद्रयुक्त पॉलिथीन बैग्स का उपयोग करें.
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चावल की फसल को बचाने के लिए नर्सरी बेड्स को रात के समय पॉलिथीन शीट से ढक दें और सुबह हटा दें. शाम को फसल की सिंचाई करें और सुबह पानी निकाल दें.
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सरसों, राजमा और चने की फसलों को ठंड से बचाने के लिए 1 लीटर सल्फ्यूरिक एसिड को 1000 लीटर पानी में मिलाएं या 500 ग्राम थियुरिया को 1000 लीटर पानी में मिलाएं और फसलों पर छिड़काव करें.
फरवरी माह के अंत तक या मार्च की शुरुआत में फसलों के प्रभावित हिस्सों की छंटाई करें. उसके बाद फसलों पर कॉपर फफूंदनाशक का छिड़काव करें और सिंचाई करते समय पानी में एनपीके डालें.
ठंड के मौसम में मिट्टी में पोषक तत्व ना डालें क्योंकि जड़ों के खराब होने के कारण पौधे पोषक तत्वों को आगे नहीं बढ़ा पाते.
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मिट्टी की छेड़छाड़ ना करें, क्योंकि मिट्टी को हिलाने से ढीली सतह निचली सतह से गर्मी के प्रवाह को कम करती है.
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