यूपी के सिद्धार्थनगर के मिश्रौलिया गांव के नियाज अहमद दिल्ली में प्राइवेट जॉब करते थे.
इस जॉब में उन्हें 16000 रुपये महीने का वेतन मिलता है.
कम सैलरी और मन नहीं लगने के चलते उन्होंने नौकरी छोड़ केले की खेती करने का फैसला किया.
सबसे पहले आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रहे डॉ.अख्तर हुसैन से केले की खेती की ट्रेनिंग ली.
उन्होंने टिशु कल्चर तकनीक के माध्यम से केले की माध्यम से 3 साल पहले केले की खेती की ट्रेनिंग ली.
इस तकनीक में पौधों की एक समान बढ़ोतरी होती है और फल भी एक समान तैयार होता है
टिश्यू कल्चर में पौधे कम मरते हैं और नर्सरी के अपेक्षा लागत भी काम आती है.
इस विधि से 15 से 16 महीने में केला तैयार हो जाता है. एक एकड़ में ₹30000 की लागत आती है जबकि इसमें एक से सवा लाख रुपए का केला तैयार हो सकता है.
टिश्यू कल्चर केले के एक पौधे पर 17 रुपए का खर्च आता है जबकि 2 साल में 14 रुपए का सरकार से अनुदान भी मिलता है.
फिलहाल, नियाज केले की खेती से लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं.