3 Feb 2025
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को आम बजट पेश किया. इस बजट में बिहार में मखाना बोर्ड बनाने का ऐलान किया गया. तो आइए जानते हैं आखिर कैसे होती है मखाने की खेती और कितना है फायदा...
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मखाने की खेती में कम लागत आती है और अच्छा मुनाफा होता है. इतना ही नहीं मखाने के लिए खाद और कीटनाशक का उपयोग नहीं होता.
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छोटे किसानों के लिए मखाने की खेती एक वरदान से कम नहीं. बिहार में देश की 80 फीसदी मखाना की खेती की जाती है.
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सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी खेती बेकार पड़ी जमीनों पर की जा सकती है. बस पानी का ज्यादा भराव होना चाहिए. मखाने की खेती जलमग्न जमीन पर होती है, जैसे तालाब.
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अगर आप इसकी खेती एक हेक्टेयर में करते हैं तो आपको डेढ़ से दो लाख रुपए का मुनाफा होगा. जमीन ज्यादा हो तो आप करोड़पति भी बन सकते हैं.
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सरकार भी मखाने की खेती के लिए सब्सिडी देती है.
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मखाने की फसल लगभग दस महीनों में तैयार हो जाती है. नवंबर महीने में इसकी नर्सरी डाली जाती है और फरवरी-मार्च में इसकी रोपाई की जाती है, फिर सितंबर-अक्टूबर तक इसकी कटाई हो जाती है.
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