26 Aug 2024
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धान के पौधों को रोगों से बचाने के लिए IMD ने सलाह जारी की है.
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IMD की सलाह मानकर आप अपने पौधों को कीट से होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं.
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धान की फसल को लेकर जारी सलाह में कहा गया है कि किसान रोपाई के दौरान खेत में 2-3 सेमी जल का स्तर बनाए रखें.
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खेत में वर्षा जल के बेहतर संचयन के लिए खेतों में मेड़ों को दुरुस्त रखें.
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रोपाई के दौरान या इसके बाद में पौधों में कई तरह के रोग और कीट से बचाने के लिए उचित दवाओं और कीटनाशक का इस्तेमाल करें.
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धान को ब्लास्ट रोग से बचाने के लिए हेक्साकोनाज़ोल 5 प्रतिशत ईसी का 30 मिलीलीटर प्रति 15 लीटर पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करें.
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ब्लास्ट रोग के अलावा फसलों में तने को सड़ने से बचाने के लिए कार्बेन्डाजिम 50% डब्ल्यूपी का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करें.
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पौधों में रोपाई के बाद तना छेदक कीट से बचाने के लिए खेत में अधिक नाइट्रोजन युक्त खाद डालना चाहिए.
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तना छेदक कीट के हमले को पौधों से बचाने के लिए रोपाई से पहले से ही कीट के अंडों को खत्म कर पौधों के ऊपरी हिस्से को काट देना चाहिए.
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इसके अलावा अंडों को एक जगह जमा करके उन्हें नष्ट कर देना चाहिए. इस रोग से बचाव के लिए पोधों की रोपाई के वक्त उचित दूरी बनाए रखें.
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इसके साथ ही खेत का लगातार निरीक्षण करते रहे. अगर खेत में तना छेदक कीट का प्रकोप दिखाई देता है तो यूरिया का प्रयोग बंद कर दें.
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इसके साथ ही नीम तेल 1500 पीपीएम का 1.5 मिली प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें.
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