11 March 2025
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क
गर्मी में सूरजमुखी की खेती लाभकारी होती है. सूरजमुखी को कम पानी की जरूरत होती है, जिससे ये शुष्क क्षेत्रों में भी अच्छी उपज देता है.
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सूरजमूखी की कुछ सामान्य किस्में हैं, जिनकी खेती कर किसान तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं. हम आपको कुछ खास टिप्स बता रहे हैं, जिससे सूरजमुखी की अच्छी खेती कर सकते हैं.
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सूरजमूखी की किस्मों में 'मॉडर्न', 'सूरज', हाइब्रिड किस्मों में 'केवीएसएच', 'एसएच-3322', 'एमएसएफएच-17' और 'वीएसएफएच-1' शामिल है. इन सभी किस्मों को पकने में 80-55 दिन लगते हैं.
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सूरजमूखी उपजाने के लिए खेत को पलेवा करके जुताई करनी चाहिए. जायद में सूरजमुखी की बुवाई का सबसे अच्छा समय फरवरी के दूसरे पखवाड़े से मार्च के अंत तक है.
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बुवाई पंक्तियों में हल के पीछे 4-5 सेंटीमीटर गहराई पर करनी चाहिए. पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15-20 सेंटीमीटर रखनी चाहिए.
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सूरजमूखी की सामान्य प्रजातियों के लिए 5-6 किलोग्राम प्रति एकड़ और संकर प्रजातियों के लिए 2-3 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज की जरूरत होती है.
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सूरजमुखी की खेती के लिए आमतौर पर, नाइट्रोजन 32 किलोग्राम, फास्फोरस 24 किलोग्राम और पोटाश 16 किलोग्राम प्रति एकड़ पर्याप्त होता है.
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पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिनों बाद करनी चाहिए. बाद में, आवश्यकतानुसार 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करते रहना चाहिए.
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