बेशक मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है. लेकिन ये भी हकीकत है कि इसी पानी में मछली बीमार भी होती है.
अगर पानी ज्यादा ठंडा या गर्म हुआ तो मछली बीमार पड़ जाती है. इसलिए पानी के तापमान में बदलाव होते ही ट्रीटमेंट करना जरूरी है.
मछली ठंडे खून वाला जीव है इसलिए उसे सर्दियों के मौसम में खास देखभाल की जरूरत होती है.
फिश एक्सपर्ट की मानें तो इस मौसम में सुबह-शाम पानी का तापमान चेक करते रहना चाहिए. आक्सीजन की मात्रा को चेक करें.
सर्दियों के दौरान किसानों को तालाब के पानी की गहराई छह फीट तक रखनी चाहिए. जिससे मछलियों को गर्म वातावरण में रहने के लिए ज्यादा जगह मिल सकेगी.
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इतना ही नहीं तालाब के नीचे के हिस्सेम और सतह के पानी को गर्म रखने के लिए शाम के समय ट्यूबवेल का पानी तालाब में जरूरत मिलाएं.
धीरे-धीरे मछलियों की खुराक को 25 से 75 फीसद तक कम कर दें.
सर्दी में मछलियां पूरा दाना नहीं खा पाती हैं. और यही बचा हुआ दाना तालाब की तली में जमा होकर गंदगी फैलाता है.