रंग-बिरंगी काठ की गुड़ियों का इतिहास जानते हैं आप? 

26 Feb 2025

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पुतली का मतलब है गुड़िया. कठपुतली का मतलब है काठ से बनी गुड़िया. हालांकि यह लकड़ी, सूती कपड़े और धातु के तार से बनी होती हैं.

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कठपुतली विश्व के प्राचीनतम रंगमंच पर खेला जाने वाले मनोरंजक कार्यक्रमों में से एक है. कठपुतलियों को विभिन्न प्रकार की गुड्डे गुड़ियों, जोकर आदि पात्रों के रूप में बनाया जाता है.

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इसका नाम कठपुतली इस कारण पड़ा क्योंकि पूर्व में भी लकड़ी अर्थात काष्ठ से बनाया जाता था.  इस प्रकार काष्ठ से बनी पुतली का नाम कठपुतली पड़ा. प्रत्येक वर्ष 21 मार्च को विश्व कठपुतली दिवस भी मनाया जाता है.

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कुछ विद्वानों का मानना है कि कठपुतली कला परंपरा हजारों साल से भी ज्यादा पुरानी है. राजस्थानी लोक कथाओं, गाथाओं और कभी-कभी लोकगीतों में भी इसका संदर्भ मिलता है. 

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राजस्थान की जनजातियां प्राचीन काल से इस कला का प्रदर्शन करती आ रही हैं और यह राजस्थानी संस्कृति , विविधता और परंपरा का एक शाश्वत हिस्सा बन गई है.

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राजस्थान में कोई भी गांव का मेला, कोई धार्मिक त्योहार और कोई भी सामाजिक समारोह कठपुतली के बिना पूरा नहीं हो सकता.  आज कठपुतली कला घूमर के बाद भारत के राजस्थान राज्य की सबसे लोकप्रिय प्रदर्शन कलाओं में से एक है.

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नई दिल्ली में भी शादीपुर डिपो में ' कठपुतली कॉलोनी ' के रूप में जाना जाने वाला एक क्षेत्र है , जहां कठपुतली कलाकार, जादूगर, कलाबाज, नर्तक और संगीतकार और अन्य घुमंतू प्रदर्शन समूह आधी सदी से बसे हुए हैं.

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पुतली कला कई कलाओं का मिश्रण है, यथा-लेखन, नाट्य कला, चित्रकला, वेशभूषा, मूर्तिकला, काष्ठकला, वस्त्र-निर्माण कला, रूप-सज्जा, संगीत, नृत्य आदि

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पहले अमर सिंह राठौड़, पृथ्वीराज, हीर-रांझा, लैला-मजनू, शीरी-फरहाद की कथाएं ही कठपुतली खेल में दिखाई जाती थीं, लेकिन अब सामाजिक विषयों के साथ-साथ हास्य-व्यंग्य और ज्ञान संबंधी अन्य मनोरंजक कार्यक्रम भी दिखाए जाने लगे हैं.

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