जब चांद पर इस शख़्स ने चलाई कार, 'Moon Buggy' देख हैरत में थी दुनिया

19 March 2025

BY: Ashwin Satyadev

चांद पर जल... जीवन... संबंधित तमाम सवाल लोगों के जेहन में हमेशा से आते रहे हैं और इनको लेकर तलाश आज भी जारी है.

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यदि आपको चांद पर कार चलाने का मौका मिले तो ये एक्सपीरिएंस कैसा होगा? यदि अब तक आपने इसके बारे में नहीं सोचा है तो एक बार सोचिए...!

आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने न केवल धरती से तकरीबन 3.84 लाख किमी दूर चांद तक की यात्रा की बल्कि चंद्रमा की सतह पर कार भी दौड़ाई. 

हम बात कर रहे हैं, 'डेविड रैंडोल्फ स्कॉट' (David Randolph Scott) की, जिन्होनें अपने जीवन के 546 घंटे और 54 मिनट अंतरिक्ष में बिताएं है.

डेविड, साल 1971 में अपोलो-15 मिशन के दौरान चांद की सतह पर गाड़ी चलाने वाले पहले व्यक्ति बने. ये कोई आम कार नहीं थी, बल्कि ये एक मून रोवर व्हीकल था.

डेविड स्कॉट अपोलो 15 मिशन के कमांडर के रूप में चंद्रमा पर चलने वाले सातवें व्यक्ति बने, जो चौथी मानव मून लैंडिंग थी.

26 जुलाई 1971 को लॉन्च हुआ अपोलो 15 मिशन का दल 31 जुलाई को चांद की सतह पर पहुंचा था. इस मिशन में रैंडोल्फ स्कॉट, लूनर मॉड्यूल पायलट जेम्स इरविन और कमांड मॉड्यूल पायलट अल्फ्रेड वर्डेन शामिल थें. 

तकरीबन 4 दिन की यात्रा के बाद स्कॉट और इरविन हेडली का ये दल चांद की सतह पर रीले नामक घाटी के पास एपिनेन पर्वत के बेस पर उतरा.

सतह पर उतरने के बाद पहले इस दल ने मून रोवर की मदद से आसपास के इलाकों की निगरानी की और उन्हें लूनर मॉड्यूल (LM) से दूर तक यात्रा की.

चांद की सतह पर एपेनाइन पर्वत का सेलेनोलॉजिकल निरीक्षण करने के लिए अपने उपकरणों को ले जाने के लिए स्कॉट और इरविन ने "रोवर -1" का उपयोग किया. 

लूनर रोविंग व्हीकल (LRV), जिसे "मून बग्गी" (Moon Buggy) के नाम से भी जाना जाता है, मई 1969 से डेवलप किया जा रहा था, इसकी जिम्मेदारी बोइंग (Boeing) को दी गई थी. 

LRV की बात करें तो चांद की सतह पर उतारते समय इसका वजन 209 किलोग्राम था और दो अंतरिक्ष यात्रियों और उनके उपकरणों को ले जाते समय इसका वजन 700 किलोग्राम था.

इस रोविंग व्हीकल के प्रत्येक पहियों में 200 W की क्षमता का इलेक्ट्रिक मोटर इस्तेमाल किया गया था. इसे 10 से 12 किमी/घंटा की स्पीड से चलाया जा सकता था. 

हालाँकि इसे कोई भी अंतरिक्ष यात्री चला सकता था, लेकिन इसको चलाने की जिम्मेदारी कमांडर को दी गई थी. खास बात ये है कि, इस लूनर रोविंग व्हीकल को केवल 17 महीनों में तैयार किया गया था .

लूनर रोविंग से अपोलो-15 के अंतरिक्ष यात्रियों ने तीन अलग-अलग ट्रेक पर लगभग 28 किमी की दूरी तय की. 7 अगस्त को यह दल वापस धरती पर लौटा था. 

मिशन से लौटने के बाद डेविड ने कहा था कि "रोवर के बिना, हम वहां कभी नहीं पहुंच पाते. रोवर बहुत फ्लेक्सिबल था और इसे चलाना आसान था."