26 March 2025
BY: Ashwin Satyadev
माइलस्टोन (Milestone), हिंदी में 'मील का पत्थर' शब्द आपने अपने जीवन में कई बार सुना होगा. सड़क किनारे लगे ये पत्थर आपको गंत्व्य की दूरी बताते हैं.
हालांकि आजकल GPS-इनेबल्ड स्मार्टफ़ोन और कारों में मिलने वाली मैप की सुविधा के चलते इन माइलस्टोन पर कम लोगों की ही निगाहें पड़ती हैं.
लेकिन एक समय था कि, इन मील के पत्थरों को ही देखकर लोग अपना सफर तय करते थें. यहां तक कि सड़क पर चलते हुए लोग आगे आने वाले माइलस्टोन का इंतज़ार भी करते थें.
लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि, इन माइलस्टोन पर अलग-अलग रंगों का इस्तेमाल क्यों होता है. माइलस्टोन पर लगी लाल, पीले और हरे रंग की इन पट्टियों का मतलब भी अलग होता है.
दिसंबर 2024 तक के डाटा के अनुसार भारत का रोड नेटवर्क तकरीबन 66.17 लाख किमी लंबा है. जो लगातार बढ़ता ही जा रहा है.
इतने लंबे रोड नेटवर्क में शामिल नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और ग्रामीण सड़कों को अलग करने के लिए मील के पत्थरों को कलर कोड द्वारा भिन्न किया जाता है.
तो आइये जानें कि अलग-अलग रंगों के माइलस्टोन का आखिर क्या मतलब होता है.
माइलस्टोन पर पीले रंग की पट्टी नेशनल हाईवे को दर्शाती है. 1.46 लाख किमी तक फैला राष्ट्रीय राजमार्ग विभिन्न राज्यों और बड़े शहरों को कनेक्ट करता है.
हरे रंग की पट्टी का इस्तेमाल स्टेट हाईवे पर लगे माइलस्टोन पर किया जाता है. देश में 1.76 लाख किमी तक फैले स्टेट हाईवे का निर्माण और प्रशासन राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है.
अगर आपको नीले रंग काले रंग की पट्टी वाला माइलस्टोन दिखाई देता है, तो इसका मतलब है कि आप शहर में या जिले की सड़क पर यात्रा कर रहे हैं.
अगर आपको मील के पत्थर पर नारंगी रंग की पट्टी दिखती है तो इसका मतलब है कि आप ग्रामीण सड़क पर यात्रा कर रहे हैं. वर्तमान में ये रोड नेटवर्क तकरीबन 7.65 लाख किमी लंबा है.
'जीरो माइल सेंटर' वह जगह है, जिसे ब्रिटिश अन्य सभी शहरों की दूरी मापने के लिए एक रेफरेंश प्वाइंट के रूप में इस्तेमाल करते थे. ये प्वाइंट नागपुर में स्थित है.
जीरो माइल स्टोन में बलुआ पत्थर से बना एक स्तंभ और चार घोड़े बनाए गए हैं. इसका निर्माण साल 1907 में किया गया था.