10 October 2024
BY: Ashwin Satyadev
टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा (Ratan Tata) अब इस दुनिया में नहीं हैं. बीते कल 9 अक्टूबर को मुंबई के ब्रीज कैंडी हॉस्पिटल में उन्होनें अंतिम सांस ली.
86 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले रतन टाटा एक कारोबारी के दिगर, हमेशा से ही देश के प्रति अपनी सेवा भावना के लिए भी जाने जाते रहे हैं.
रतन टाटा की एक ख्वाहिश थी कि देश में मध्यम वर्गीय परिवार भी कार में सफर कर सके. अपने इस ख्याल को हकीकत की शक्ल देने के लिए उन्होनें हर मुमकिन कोशिश भी की.
इसके लिए उन्होनें अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के तौर पर दुनिया की सबसे सस्ती कार Tata Nano को भी लॉन्च किया. जिसकी कीमत उस वक्त महज 1 लाख रुपये थी.
Tata Nano को लखटकिया कार भी कहा जाता था. छोटी कार नैनो को बनाने के पीछे रतन टाटा की बड़ी सोच थी. उन्होनें एक बार एक इंटरव्यू में इसके पीछे की कहानी भी बताई थी.
रतन टाटा ने कहा था कि, उन्होनें कई भारतीय परिवारों को टू-व्हीलर पर सफर करते देखा था. जिसमें पिता स्कूटर चला रहा है एक बच्चा आगे खड़ा है और पीछे पत्नी दूसरे बच्चे को गोद में लेकर बैठी है.
ऐसे कंडिशन में लोग रात-दिन या बारीश हर वक्त सफर करने को मजबूर थें. किसी भी परिवार के लिए इस तरह यात्रा करना बेहद खतरनाक था.
रतन इंटरव्यू में कहते हैं कि, मैने खुद से पूछा कि क्या हम उन्हें एक सुरक्षित वाहन दे सकते हैं. जो उन्हें धूल, धूप और बारीश से बचाए.
इसलिए मेरे मन में एक सस्ती कार बनाने का ख्याल आया. जिसकी कीमत बस 1 लाख रुपये हो.
बता दें कि, रतन टाटा ने साल 2008 में दुनिया की सबसे सस्ती कार यानी Tata Nano को लॉन्च किया. इस कार ने बाजार में आते ही धूम मचा दी.
उस वक्त हर कोई इस कार को खरीदने की सोच रहा था. नैनो के लॉन्च के बाद ही Maruti 800 की बिक्री में तकरीबन 20 प्रतिशत की गिरावट आ गई थी.
महज 624 सीसी पेट्रोल इंजन से लैस इस कार की लंबाई 3,099 मिमी, चौड़ाई 1,390 मिमी और उंचाई 1,652 मिमी थी. इसका कुल वजन 600–635 किग्रा था.
इसकी टॉप स्पीड 105 किमी/घंटा थी और एक लीटर पेट्रोल में ये कार तकरीबन 25 किमी तक का माइलेज देती थी.