20 September 2024
BY: Aaj Tak Auto
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कार के केबिन में संभावित रूप से हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल पर चिंता जताई है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर कानूनी जांच शुरू हो गई है.
NGT ने कारों में कैंसर पैदा करने वाले रसायनों के इस्तेमाल से संबंधित मामले में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से जवाब मांगा है.
दरअसल, कुछ दिनों पहले एक स्टडी में बताया गया था कि कारों केबिन के कंपानेंट्स में TDCIPP और TCEP केमिकल्स का इस्तेमाल फ्लेम रिटार्डेंट (अग्निरोधी) के रूप में किया जाता है.
स्टडी में कहा गया कि इन केमिकल्स से कैंसर होने का खतरा है और अधिकांश कारों के केबिन की हवा में अग्निरोधी रसायन मौजूद हैं.
स्टडी में पाया गया है कि ऑर्गनोफॉस्फेट एस्टर फ्लेम रिटार्डेंट स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक होते हैं और इससे कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है.
शोधकर्ताओं ने परीक्षण किए गए सभी 101 वाहनों के केबिन की हवा में इन हानिकारक रसायनों को पाया है.
स्टडी के मुताबिक, लंबे समय तक ट्रिस (1-क्लोरो-इसोप्रोपाइल) फॉस्फेट के संपर्क में रहने से न्यूरोटॉक्सिसिटी और थायरॉयड फ़ंक्शन पर बुरा असर पड़ता है.
इससे कार में इन केमिकल्स की मौजूदगी एक चिंता का विषय बन गई है. विशेष रूप से लंबी यात्रा करने वाले लोगों के लिए. क्योंकि वो इस तरह की हवा में ज्यादा वक्त गुजारते हैं.
NGT के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के पास फिलहाल यह जांचने की व्यवस्था नहीं है कि ये पदार्थ कैंसरकारी हैं या नहीं.
बता दें कि, TDCIPP का इस्तेमाल कार की सीट के फोम में किया जाता है. ये केमिकल क्लोरीनयुक्त एल्काइल फॉस्फेट फैमिली से आता है.