3 February 2025
BY: Ashwin Satyadev
दुनिया में ऑटोमोबाइल का श्रेय जर्मन इंजीनियर और मर्सिडीज बेंज के फाउंडर कार्ल बेंज को जाता है. 140 साल पहले (1985 में) बेंज ने ही दुनिया की पहली कार को पेश किया था.
समय के साथ कारों की दुनिया ने बड़ा बदलाव देखा और पेट्रोल-डीजल, सीएनजी, इलेक्ट्रिक होते हुए हाइड्रोजन तक का सफर तय हो चुका है.
लेकिन इस दौरान जो सबसे जरूरी इन्वेंशन हुए हैं वो हैं कारों में दिए जाने वाले सेफ्टी फीचर्स. इस दिशा में कई अलग-अलग एक्सपर्ट्स और कंपनियों ने काम किया है.
लेकिन सेफ्टी के मामले में जो मुकाम स्वीडिश कार ब्रांड वोल्वो (VOLVO) को हासिल है वो सबसे अलग है. स्वीडन की इस कंपनी ने यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से कई जरूरी सेफ्टी फीचर्स का इजाद किया है.
सेफ्टी को लेकर कंपनी का कहना है कि, "इससे पहले कि दुनिया समझ पाती हमने लोगों को सुरक्षित रखना शुरू कर दिया था."
कंपनी कहती है कि, साल 1959 से, जब दुनिया पलकें झपका रही थी, हम इंसानों के लिए कवच डिजाइन कर रहे थे. थ्री-प्वाइंट सीट बेल्ट सिर्फ़ पट्टियाँ नहीं थीं वो स्वीडिश शुद्धता के साथ सिली गई जीवन रेखाएँ थीं.
ऑटोमोबाइल इतिहास में सेफ्टी फीचर्स को बेहतर बनाने के लिए वोल्वो ने कई शानदार काम किए हैं. तो आइये देखें वोल्वो द्वारा आविष्कृत कुछ जरूरी सेफ्टी फीचर्स-
1959 में वोल्वो इंजीनियर निल्स बोहलिन द्वारा आविष्कार की गई थ्री-प्वाइंटेड सीट बेल्ट को ऑटोमोटिव इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण सेफ्टी फीचर्स में से एक माना जाता है.
सीट बेल्ट ने अब तक दुनिया में कई जिंदगियां बचाई हैं. वोल्वो इस आविष्कार की महत्वत्ता को भली-भाँति समझती थी, इसलिए कंपनी ने इसका पेटेंट जारी किया, ताकि दूसरे वाहन निर्माता भी इसका इस्तेमाल कर सकें.
वोल्वो ने 1964 में पहली बार पीछे की ओर मुंह करने के बैठने वाली चाइल्ड सीट का परीक्षण किया था. वाहनों में इसका इस्तेमाल साल 1972 से शुरू किया गया.
साल 1978 में कंपनी ने सामने की तरह मुंह करने बैठने वाली चाइल्ड सीट इजाद की. इसने बच्चों को आगे की ओर मुंह करके यात्रा करने की सुविधा दी, जिससे सुरक्षा और आराम बढ़ गया.
वोल्वो 1991 में साइड इम्पैक्ट सेफ्टी सिस्टम शुरू करने वाली पहली कंपनी थी. कार के स्ट्रक्चर में बदलाव कर मजबूत सीटें और साइड-इम्पैक्ट एयरबैग पेश किए गए. जो टक्कर की स्थिति में यात्रियों की छाती और सिर की सुरक्षा करते हैं.
वोल्वो ने 1998 में व्हिपलैश सेफ्टी सिस्टम डेवलप किया. जिसमें हेड रेस्ट्रेंट और सीट शामिल है. जो पीछे से टक्कर होने पर गर्दन की चोट के जोखिम को 50% तक कम करता है.
वोल्वो ने साल 1998 में इन्फ्लेटेबल कर्टन एयरबैग पेश किया. जो छत से खुलते हुए साइड विंडो को कवर करता है. जिससे साइड इम्पैक्ट या रोलओवर की स्थिति में यात्रियों के सिर को सुरक्षा मिलती है.
2003 में वोल्वो ने ब्लाइंड स्पॉट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (BLIS) इन्वेंट किया. जो कार के ब्लाइंड स्पॉट में आने वाले वाहनों का पता लगाने के लिए कैमरों और रडार का उपयोग करता है.
वोल्वो ने 2008 में ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम को डेवलप किया. जो सड़क पर कार के सामने किसी ऑब्जेक्ट या आपात स्थिति में इमरजेंसी ब्रेकिंग अप्लाई करता है. ये सुरक्षा को और बेहतर करता है.
वोल्वो ने 2010 में ऑटोमेटिक ब्रेक के साथ पेडेस्ट्रियन डिटेक्शन (पैदल यात्री पहचान) सिस्टम शुरू किया. जो कार के सामने पैदल यात्रियों का पता लगाने के लिए रडार और कैमरे का उपयोग करता है.
वोल्वो ने 2018 में ऑनकमिंग मिटिगेशन बाय ब्रेकिंग सिस्टम शुरू किया. जो सामने से आने वाले वाहन को डिटेक्ट कर ऑटोमेटिक ब्रेक अप्लाई करता है. जिससे सामने की टक्कर से बचाव होता है.
वोल्वो अपने आने वाली इलेक्ट्रिक कारों में LIDAR सिस्टम को बतौर स्टैंडर्ड देने जा रही है. जो सड़क पर कारों के ऑटोनॉमस ड्राइविंग को और भी बेहतर बनाएगा.