02 APR 2025
Himanshu Dwivedi
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'लिबरेशन डे' से पहले आज फार्मा स्टॉक पर सबकी नजर है, जहां वे कई देशों और सेक्टर्स में अमेरिकी आयात पर रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान करेंगे.
डॉ रेड्डीज लैब्स और जाइडस लाइफसाइंसेज की अगुआई वाली भारतीय जेनेरिक फार्मा कंपनियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.
घरेलू फार्मा सेक्टर पर 35 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है. जिसमें 10 प्रतिशत देश पारस्परिक टैरिफ और 25 प्रतिशत सेक्टर टैरिफ शामिल है.
यह WTO के आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें बताया गया है कि भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर लगाया जाने वाला व्यापार वेटेज एवरेज टैरिफ 12 प्रतिशत है.
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाया जाने वाला टैरिफ 2.2 प्रतिशत है, जिसका अर्थ है कि औसत टैरिफ अंतर 10 प्रतिशत अंकों का है.
नोमुरा का मानना है कि फार्मा टैरिफ आज नहीं लगाए जा सकते, बल्कि उन्हें बाद की तारीख तक के लिए टाल दिया जा सकता है. हालांकि इसका प्रभाव कुछ कंपनियों पर पड़ सकता है.
सन फार्मा के यूएस स्पेशलिटी राजस्व का 10 फीसदी अमेरिका में तैयार किया जाता है. बाकी 90 प्रतिशत अमेरिका के बाहर. ऐसे में नोमुरा का कहना है कि इसपर ज्यादा असर दिखाई दे सकता है.
नोमुरा ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 26 में DRL का अमेरिकी राजस्व 1.5 बिलियन डॉलर और वित्त वर्ष 27 में 1.1 बिलियन डॉलर होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिकी बाजार पर उच्च निर्भरता के कारण डॉ रेड्डीज पर प्रभाव दिख सकता है.
नोमुरा ने वित्त वर्ष 26 और वित्त वर्ष 27 में Cipla का डॉलर रेवेन्यू 900-950 मिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया है. कंपनी ने कहा कि अमेरिका से संचालित इनवेजेन साइट्स से अमेरिकी रेवेन्यू में 25-30 प्रतिशत का योगदान होने की संभावना है.
इसी तरह, Lupin, Zydus Lifesciences, Aurobindo Pharma, Glenmark Pharma और Torrent Pharma के शेयरों पर असर पड़ सकता है.
नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.