07 Sep 2024
12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद कंप्यूटर की पढ़ाई में रुचि रखने वाले ज्यादातर स्टूडेंट्स BCA या B.Sc में ग्रेजुएशन करना चाहते हैं.
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इन दोनों ही कोर्स में कंप्यूटर से जुड़ी पढा़ई करवाई जाती है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि फिर इनमें फर्क क्या है? आइए हम आपको बताते हैं.
बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (बीसीए) और बीएससी कंप्यूटर साइंस दो पाठ्यक्रम हैं, जो इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सफल करियर के द्वार खोलते हैं.
बीसीए, इंटरनेट टेक्नोलॉजी, वेब डेवलपमेंट और मोबाइल एप्लीकेशन की समग्र समझ प्रदान करता है.
यह एक प्रैक्टिकल प्रोग्राम होने के नाते बीसीए सी और सी++ जैसी प्रोग्रामिंग भाषा, बिजनेस कम्युनिकेशन, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, नेटवर्किंग, ई-कॉमर्स और मल्टीमीडिया सिस्टम पर जोर देता है.
बैचलर ऑफ कंप्यूटर साइंस (बीएससी सीएस) तीन वर्ष का ग्रेजुएट प्रोग्राम है, जो कम्प्यूटर साइंस की मूल अवधारणा पर केंद्रित है.
बीसीएस कंप्यूटर साइंस, कंप्यूटर फंडामेंटल्स, आर्किटेक्चर, डाटा स्ट्रक्चर और सी प्रोग्रामिंग की समग्र समझ प्रदान करता है. यह एक सैद्धांतिक एजुकेशन प्रोग्राम है, जिसमें गणितीय पहलुओं, प्रोग्रामिंग, सांख्यिकी और इलेक्ट्रॉनिक की अवधारणा पर जोर देता है.
बी.एससी. कंप्यूटर साइंस एक अवधारणा-उन्मुख और सैद्धांतिक प्रोग्राम है, इसलिए यह कार्यक्रम उच्च अध्ययन और शिक्षाविदों के लिए उपयुक्त है.
बीएससी कम्प्यूटर साइंस, कंप्यूटर विज्ञान की मौलिक अवधारणा पर जोर देता है. यह कोर्स क्लाइंट के साथ काम करने, उनकी ज़रूरत के हिसाब से सॉफ्टवेयर डिजाइन करने, टेस्टिंग और सॉफ्टवेयर डॉक्यूमेंटेशन जैसे कौशल नहीं सिखाता.
बीसीए एक रोजगार-उन्मुख शिक्षा कार्यक्रम है, यह कोर्स आपको आईटी कंपनियों में अलग-अलग जॉब प्रोफाइल में कुशलतापूर्वक काम करने के लिए तैयार करता है.