05 Feb 2025
दिल्ली में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान जारी है. दिल्ली की सभी 70 सीटों पर आज एक ही चरण में मतदान हो रहा है.
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ऊंगली पर लगने वाली ये स्याही मिटाने से नहीं मिटती है. यह इतनी पक्की होती है कि इसे साबुन पानी से मिटाना भी आसान नहीं है.
दरअसल, देश में साल 1951-52 में पहली बार चुनाव हुए थे. इस चुनाव में डुप्लीकेसी की कुछ शिकायतें चुनाव आयोग को मिलीं.
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इसे रोकने के लिए समाधान निकाला गया कि वोट डालने के बाद वोटर की उंगली पर एक स्याही का निशान लगाया जाए. जिससे ये पता चल सके कि वो वोट डाल चुका है.
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लेकिन इसमें चुनौती ये थी निशान उस स्याही से बनना चाहिए जिसका निशान आसानी से न मिटाया जा सके. इसके बाद इस स्याही को तैयार किया गया.
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गाढ़े नीले रंग की इस स्याही को बनाने का जिम्मा भारत में एक ही कंपनी के पास है, जिसका नाम मैसूर पेंट्स एंड वार्निश लिमिटेड (Mysore Paints and Varnish Limited) है.
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1962 के आम चुनावों में पहली बार इस स्याही का इस्तेमाल किया गया था.
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ये अमिट स्याही सिल्वर नाइट्रेट से तैयार किया गया Special Patented Formula है
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जो स्किन या नाखून पर अर्द्ध-स्थायी दाग (Semi-Permanant Stain) बना देती है, जो अप्लाई करने के बाद कुछ हफ्तों तक बना रहता है.
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