13 June 2024
हर मुसलमान की ये ख्वाहिश होती है कि वो जिंदगी में कम से कम एक बार हज कर सके लेकिन ज्यादा खर्चा, ज्यादा वक्त और लंबा प्रॉसेस के चलते हर किसी के लिए ये मुमकिन नहीं हो पाता.
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जो लोग हज के लिए समर्थ नहीं होते वो उमरा करना चाहते हैं.लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों में क्या फर्क होता है.
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हज इस्लाम के 5 फर्ज में से एक है हालांकि, हज उन लोगों को करना जरूरी है, जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं. जबकि उमरा करना फर्ज नहीं है.
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हज अपने तय समय (जिल्-हिज्जाह के महीने के दौरान) पर किया जा सकता है, जबकि उमरा कभी भी किया जा सकता है (सिवाय जिल्-हिज्जाह के महीने में).
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हज के लिए कम से कम 6 दिन की लंबी प्रक्रिया होती है, जिसमें तवाफ के साथ कुर्बानी, शैतान को पत्थर मारना, अराफात के मैदान में ठहरना जैसी कई चीजें शामिल होती हैं.
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जबकि उमराह में बस तवाफ और सई की जाती है. ये प्रक्रिया कुछ घंटों में भी हो सकती है. हालांकि, लोग कुछ दिन के लिए जाते हैं और हर रोज ये प्रक्रिया करते हैं.
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तवाफ काबे के चारों ओर गोल घेरे में चक्कर लगाना होता है, एक तवाफ़ सात चक्करों से मिलकर बना होता है. हर चक्कर काले पत्थर हजरें अस्वद पर शुरू और खत्म होता है.
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सई, सफा और मारवा की दो पहाड़ियों के बीच 7 चक्कर लगाने को कहा जाता है.
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