02 April 2025
मशरूम की ईंट और मशरूम के घर... सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन पर्यावरण को बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने वाकई में ऐसा तरीका खोज निकाला है.
मशरूम से ईंट बनाने की तकनीक पर दुनिया भर में रिसर्च चल रही है. 2024-25 में इस क्षेत्र में कुछ रोचक प्रगति हुई है.
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक स्टडी में पाया कि मशरूम की जड़ यानी माइसीलियम से बनी सामग्री पुरानी ईंटों की तुलना में 20-30% बेहतर होंगी.
मशरूम से बनी ईंटें थर्मल इंसुलेशन यानी इससे बने घर गर्मी और सर्दी में ऊर्जा बचाने में मदद कर सकते हैं.
इसके अलावा, एक रिसर्च के मुताबिक, माइसीलियम को मजबूत करने के लिए वैज्ञानिक अब इसमें प्राकृतिक रेशे (जैसे भांग या जूट) मिला रहे हैं.
इस मिश्रण को एक सांचे (मोल्ड) में डालकर कुछ दिनों (लगभग 5-7 दिन) तक अंधेरे और नम जगह पर रखा जाता है. इस दौरान माइसीलियम कचरे को आपस में जोड़कर मजबूत बनाता है.
गर्मी से माइसीलियम निष्क्रिय हो जाता है और एक हल्की, मजबूत ईंट तैयार हो जाती है. यह प्रक्रिया बिना ज्यादा बिजली या ईंधन के होती है, जो इसे खास बनाती है.
इससे ईंटें और टिकाऊ हो रही हैं, जो बड़े निर्माण में भी इस्तेमाल हो सकती हैं. भारत में भी कुछ स्टार्टअप्स इस तकनीक पर काम कर रहे हैं.
हालांकि, अभी यह तकनीक बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं है. वैज्ञानिक इसकी मजबूती को और बढ़ाने और मौसम की मार (जैसे बारिश) से बचाने के तरीके खोज रहे हैं. फिर भी, यह भविष्य के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
कोलंबिया के सिंथेटिक जीवविज्ञानी हैरिस वांग के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की एक टीम ने फंगस-आधारित बायो-ईंटें बनाई हैं.
उनका कहना है कि ये ईंटें लंबे समय तक चलेंगी और बिना गारे के एक-दूसरे से जुड़कर खुद दरारें ठीक कर लेंगी.
साइंटिस्ट हैरिस वांग की लैब में उनके साथ काम करने वाले स्टूडेंट रॉस मैकबी के मुताबिक अगर कोई बायो ईंट डेमेज हो जाती है, तो आपको बस दरार में कुछ अतिरिक्त फफूंद भरनी होगी.
रॉस मैकबी कहते हैं कि दरार में फंफूद भरने के कुछ ही दिनों में मशरूम से बनी बायो ईंट अपने आप ठीक हो जाएगी. टीम की यह रिसर्च नेचर मैटेरियल्स मैग्जीन में भी छपी है.
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