29 Oct 2024
जम्मू में आतंकी मुठभेड़ के दौरान सेना के डॉग 'फैंटम' ने अपनी जान की कुर्बानी दी. गोली लगने की वजह से कुत्ते की मौत हो गई.
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आर्मी में जवानों के साथ ऑपरेशन में डॉग्स की भी अहम भूमिका होती है. जिनके लिए कहा जाता है कि रिटायरमेंट के बाद इन डॉग्स को गोली मार दी जाती है.
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ऐसे में जानते हैं इस बात में कितनी सच्चाई है और क्या सही में आर्मी डॉग्स को मार दिया जाता है?
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बता दें कि आर्मी में डॉग्स को रैंक दी जाती है और इनके रिटायरमेंट पर कई रस्म भी फॉलो की जाती है. लेकिन गोली मारने वाली बात सच नहीं है.
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गोली मारने के पीछे दावे किए जाते हैं कि रिटायरमेंट के बाद इसलिए डॉग्स को गोली मार दी जाती है, क्योंकि अगर ये गलत हाथों में पड़ गए तो मुश्किल हो सकती है.
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साल 2015 में सेना ने जानवरों की इच्छामृत्यु (दया-हत्या) बंद कर दी है, इसके बाद से डॉग्स को गोली नहीं मारी जाती है.
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बता दें कि रिटायरमेंट के बाद इन कुत्तों को मेरठ (कुत्तों के लिए), और उत्तराखंड के हेमपुर (घोड़ों के लिए) के ‘वृद्धाश्रम’ में भेज दिया जाता है.
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