18 Jan 2025
भारतीय रेलवे से हर दिन लाखों लोग सफर करते हैं. भारत में अधिक दूरी के लिए अधिकतर लोग ट्रेन से सफर करना पसंद करते हैं.
ट्रेन से सफर करना किफायती के साथ-साथ सुविधाजनक भी है.
जब भी आपने ट्रेन में सफर किया होगा तो जरूर देखा होगा कि ट्रेन में स्टियरिंग नहीं होता, लेकिन फिर भी ट्रेन में ड्राइवर यानि लोको पायलट होते हैं.
क्या आपने कभी सोचा है कि ट्रेन में सारा काम ऑटोमैटिक होता है, फिर लोको पायलट क्या काम करता है, चलिए जानते हैं.
आपको बता दें कि अगर आपको लगता है कि ट्रेन की इंजन में बैठा लोको पायलट ट्रेन चलाता है तो आप गलत सोचते हैं.
सबसे पहले जान लें कि लोको पायलट ट्रेन को अपनी मर्जी से न चला सकता है और न रोक सकता है.
ट्रेन को रोकने और पटरी बदलने के लिए रेलवे अलग से कर्मचारियों को नियुक्त करता है.
इन कर्मचारियों को Pointsman कहा जाता है. ये स्टेशन मास्टर्स के निर्देशों पर पटरियों को जोड़ते हैं.
ट्रेन को स्टेशन के किस प्लेटफार्म पर ट्रेन को रोकना और किस स्टेशन पर नहीं रोकना है, इसका फैसला भी रेलवे बोर्ड का हेड क्वार्टर करता है.
लोको पायलट का पहला काम सिग्नल को देखकर निर्देश अनुसार, ट्रेन की स्पीड ज्यादा या कम करना होता है. लोको पायलट के पास स्टियरिंग नहीं होता है लेकिन वे ट्रेन के गियर जरूर बदल सकता है.
लोको पायलट को पटरी के बराबर में लगे साइन बोर्ड पर बने संकेतों के अनुसार स्पीड को बदलना होता है और हॉर्न बजाने होते हैं.
इमरजेंसी कंडीशन में जब वरिष्ठ अधिकारियों से न हो पाए तो ट्रेन के सबसे पिछले डिब्बे में मौजूद गार्ड के साथ बातचीत करके सही फैसला लेना भी लोको पायलट का काम है.