22 October 2024
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भारत में कई सारी नदियां ऐसी हैं, जिसके जल को पवित्र माना जाता है. गंगा, यमुना सहित कई अन्य नदियों की पूजा भी की जाती हैं. वहीं एक ऐसी नदी भी है, जिसे इतना अपवित्र माना जाता है कि उसके पानी तक को छूने से लोग डरते हैं.
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जिस नदी के पानी तक को छूने से लोग डरते हैं. उस नदी का नाम कर्मनाशा है. यह नदी बिहार के कैमूर जिले से निकलती है और उत्तर प्रदेश के सोनभद्र, चंदौली, वाराणसी, और गाजीपुर जिलों से होकर बहती है.
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कर्मनाशा नदी का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है - कर्म और नाश. यानी जहां आपके कर्मों का यानी जितने अच्छे काम किये हैं, उनका नाश हो जाता है.
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मान्यता है कि यह नदी शापित है और इसके कारण इस नदी के पानी में नहाने या इसका इस्तेमाल करने से लोगों के कर्म यानी पुण्य का नाश हो जाता है.
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कर्मनाशा नदी के शापित होने की वजह से ही लोग इससे दूर भागते हैं. इस वजह से लोग इस नदी के पानी को छूना तक पसंद नहीं करते हैं.
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कर्मनाशा नदी के शापित होने के पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी है. मान्यता के अनुसार राजा हरिश्चंद्र के पिता राजा सत्यव्रत को विश्वामित्र ने अनुष्ठान कर सशरीर स्वर्ग भेज रहे थे.
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बीच रास्ते में ही इंद्र ने उन्हें रोक दिया. तब विश्वामित्र अपने तप के बल से उन्हें स्वर्ग भेजने पर अड़ गए. इस वजह से सत्यव्रत बीच में ही उल्टा लटक गए, जो त्रिशंकु कहलाएं.
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स्वर्ग से उल्टा लटकने के कारण त्रिशंकु के मुंह से लार बह निकली. इसी लार से कर्मनाशा नदी का जन्म हुआ. मान्यता है कि कर्मनाशा नदी में नहाने से पुण्य नष्ट हो जाते हैं.
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कई सालों तक कर्मनाशा नदी, कोसी की तरह बिहार के लिए बाढ़ आपदा का कारण रही है. हर साल मानसून में यह नदी विकराल हो जाती है. (यहां इस्तेमाल की गई सभी फोटो AI जेनरेटेड और प्रतीकात्मक हैं.)
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