27 Dec 2024
92 साल की उम्र में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन हो गया.
1991 में भारतीय अर्थव्यवस्था को उदारीकरण की राह पर ले जाने वाले डॉ. मनमोहन सिंह का योगदान कभी नहीं भुलाया जा सकता.
मनमोहन सिंह ने पंजाब विश्वविद्यालय से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की है.
इसके बाद उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से स्नातक और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की.
डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने छात्र जीवन को याद करते हुए कहा था, "यह मेरे जीवन का सबसे सुखद समय था." यह बात उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय (PU) और अमृतसर के हिंदू कॉलेज में बिताए अपने दिनों को याद करते हुए कही थी.
पदचिह्नों के रूप में, डॉ. सिंह ने हमेशा अपने सफलता का श्रेय अपने मेंटर, डॉ. एस बी रंगनेकर को दिया, जो पंजाब विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख थे.
1957 में जब डॉ. सिंह विश्वविद्यालय लौटे, तो उन्होंने सीनियर लेक्चरर के रूप में काम शुरू किया और 1966 तक पंजाब विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में पंजाब विश्वविद्यालय का दौरा करते हुए उन्होंने कहा, "डॉ. रंगनेकर और उनकी पत्नी शालिनी ने मुझे परिवार की तरह अपनाया. वह समय मेरे जीवन का सबसे खुशहाल था".
प्रोफेसर एच एस शेरगिल, जो उनके छात्र रहे हैं, ने कहा, "वह हर लेक्चर के लिए पूरी तैयारी करके आते थे, स्पष्टता से बोलते थे, और सम्मान प्राप्त करते थे. हम छात्रों ने कभी उनके लेक्चर में देर नहीं की".
1948 में स्नातक होने के 70 साल बाद, डॉ. सिंह ने कहा था, ''मैं आज जो भी हूं मुझे इस कॉलेज ने बनाया है''. उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी में इंटरमीडिएट और स्नातक परीक्षा में टॉप किया था और अर्थशास्त्र में BA (Honours) की डिग्री प्राप्त की थी.
1967 में विश्वविद्यालय छोड़ने के बाद, डॉ. सिंह दो बार विश्वविद्यालय लौटे, जहां उन्हें दो सम्माननीय डिग्रियां दी गईं.
12 मार्च, 1983 को उन्हें 'डॉक्टर ऑफ लिटरेचर' और 11 मार्च, 2009 को 'डॉक्टर ऑफ लॉ' की सम्माननीय डिग्री से नवाजा गया.