05 Nov 2024
उत्तर प्रदेश के मदरसों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें अदालत ने मदरसा एक्ट को संविधान के खिलाफ बताया था.
Credit: India Today Archive
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सभी मदरसे क्लास 12 तक के सर्टिफिकेट दे सकेंगे लेकिन उसके आगे की तालीम का सर्टिफिटेक देने की मान्यता मरदसों के पास नहीं होगी.
Credit: PTI
उत्तर प्रदेश में करीब 25,000 मदरसे हैं, जिनमें से लगभग 16,000 मदरसों को यूपी मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त है.
Credit: PTI
ऐसे में आइए जानते हैं कि मदरसे का इतिहास क्या है और पहला मदरसा कब और किसने बनवाया था.
Credit: India Today Archive
जानकारी के मुताबिक, भारत के पहले मदरसे की स्थापना मोहम्मद गौरी के शासनकाल के समय हुई थी. पहला मदरसा सन 1192 में अजमेर में खोला गया था.
Credit: India Today Archive
कहा जाता है कि अकबर ने मदरसों में सभी विषयों को पढ़ाए जाने की शुरुआत की थी. खिलजी, तुगलक वंश के दौरान मदरसों की स्थापना होनी जारी रही.
Credit: Getty Images
मदरसों का सिलेबस वर्तमान और पहले के विद्वान उलेमाओं के सुझावों के हिसाब से तैयार किया गया है. आधुनिक समय में इसमें कंप्यूटर शिक्षा तक शामिल की गई है.
Credit: AFP
इसके अलावा यहां अकीद, दिनायत, कुरान, उर्दू, हिंदी, अंग्रेजी, गणित, भूगोल, विज्ञान, अरबी, पर्शियन, मांटिग, फिलॉसफी, हैत, उरोज, कलाम, मा-अनी-वा-बयान, इतिहास, तफसीर और हदी वा उसूल ए हदीस जैसे विषयों की पढ़ाई होती है.
Credit: AFP
इसके साथ ही मदरसों में विश्वविद्यालयों के द्वारा प्रस्तावित ब्रिज कोर्स भी कराए जाते हैं. इससे मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को मुख्य धारा की उच्च शिक्षा मिलती है.
Credit: India Today Archive