Madrasa History: 832 साल पहले इस शहर में खुला था पहला मदरसा, जानिए यहां क्या पढ़ते हैं बच्चे

05 Nov 2024

उत्तर प्रदेश के मदरसों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें अदालत ने मदरसा एक्ट को संविधान के खिलाफ बताया था.  

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कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सभी मदरसे क्लास 12 तक के सर्टिफिकेट दे सकेंगे लेकिन उसके आगे की तालीम का सर्टिफिटेक देने की मान्यता मरदसों के पास नहीं होगी.

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उत्तर प्रदेश में करीब 25,000 मदरसे हैं, जिनमें से लगभग 16,000 मदरसों को यूपी मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त है.

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ऐसे में आइए जानते हैं कि मदरसे का इतिहास क्या है और पहला मदरसा कब और किसने बनवाया था.

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जानकारी के मुताबिक, भारत के पहले मदरसे की स्थापना मोहम्मद गौरी के शासनकाल के समय हुई थी. पहला मदरसा सन 1192 में अजमेर में खोला गया था.

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कहा जाता है कि अकबर ने मदरसों में सभी विषयों को पढ़ाए जाने की शुरुआत की थी. खिलजी, तुगलक वंश के दौरान मदरसों की स्थापना होनी जारी रही.

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मदरसों का सिलेबस वर्तमान और पहले के विद्वान उलेमाओं के सुझावों के हिसाब से तैयार किया गया है. आधुनिक समय में इसमें कंप्यूटर शिक्षा तक शामिल की गई है.

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इसके अलावा यहां अकीद, दिनायत, कुरान, उर्दू, हिंदी, अंग्रेजी, गणित, भूगोल, विज्ञान, अरबी, पर्शियन, मांटिग, फिलॉसफी, हैत, उरोज, कलाम, मा-अनी-वा-बयान, इतिहास, तफसीर और हदी वा उसूल ए हदीस जैसे विषयों की पढ़ाई होती है.

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इसके साथ ही मदरसों में विश्वविद्यालयों के द्वारा प्रस्तावित ब्रिज कोर्स भी कराए जाते हैं. इससे मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को मुख्य धारा की उच्च शिक्षा मिलती है.

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