मोदी ट्रंप की बातचीत में सबसे ज्यादा चर्चा में रहा टैरिफ, आसान भाषा में समझिए आखिर ये है क्या?

14 Feb 2025

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने PM मोदी से मुलाकात कर भारत समेत सभी व्यापार भागीदार देशों पर टैरिफ लगाने के प्लान पर साइन किए हैं.

इस बीच लोगों के मन में सवाल है कि आखिर ये टैरिफ होता क्या है. आइए आपको आसान भाषा में इसका सही मतलब समझाते हैं.

सबसे पहले तो यह समझिए कि हर देश के पास सीमित संसाधन होते हैं. उदाहरण के तौर पर जैसे एक देश में तेल का उत्पादन बहुत ज्यादा हो सकता है, जबकि दूसरे देशों में गेहूं और बाजरा की खेती ज्यादा होती है.

यदि किसी देश को तेल की आवश्यकता होती है, तो वह दूसरे देशों से तेल खरीदता है. इसी तरह, विभिन्न देशों के बीच व्यापार होता है ताकि वे अपनी जनसंख्या की जरूरतों को पूरा कर सकें.

लेकिन सामान के इस लेन-देन में एक तरह का टैक्स भी लगाया जाता है, जिसे टैरिफ कहते हैं. टैरिफ एक प्रकार का टैक्स है, जो एक देश दूसरे देश से आयात किए गए सामान पर लगाता है.

अगर एक देश किसी आयातित वस्तु पर टैरिफ लगाता है, तो दूसरा देश भी उस देश से आयात किए गए सामान पर टैरिफ लगा सकता है. वहीं, अगर दोनों देश एक दूसरे पर सामान टैक्स लगाते हैं तो उसे 'Reciprocal Tariff' कहा जाता है.

टैरिफ का उपयोग आयात (Import) को प्रतिबंधित करने के लिए भी किया जाता है.

सीधे शब्दों में कहें तो, यह उन वस्त्रों और सेवाओं की कीमत बढ़ा देता है जो किसी दूसरे देश से खरीदी जाती हैं, जिससे वे घरेलू उपभोक्ताओं के लिए कम आकर्षक हो जाती हैं.

Investopedia के अनुसार, यह समझना जरूरी है कि एक टैरिफ, निर्यातक (Exporter) देश को प्रभावित करता है क्योंकि जिस देश ने टैरिफ लगाया है, वहां के उपभोक्ता कीमत बढ़ाने के कारण आयात (Import) बंद कर सकते हैं.

हालांकि, अगर उपभोक्ता फिर भी महंगे आयातित सामान को चुनता है, तो इसका मतलब है कि उसने बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद उस सामान को खरीदने का फैसला लिया है.

इससे यह होता है कि टैरिफ ने उस दूसरे देश में उपभोक्ता के लिए आयातित सामान की कीमत को बढ़ा दिया है, इससे उसकी कॉस्ट बढ़ जाती है.

इसका असर निर्यातक (exporter) पर भी पड़ सकता है क्योंकि उनका सामान भी अब महंगी हो जाएंगा और उपभोक्ता शायद उन्हें न खरीदें.

सरकारें टैरिफ का उपयोग राजस्व जुटाने के लिए भी कर सकती हैं. इस प्रकार के टैरिफ को "राजस्व टैरिफ" कहा जाता है और इसका उद्देश्य आयातों को प्रतिबंधित करना नहीं होता है.

उदाहरण के लिए, 2018 और 2019 में, US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार में हुए लॉस को बैलेंस करने के लिए कई वस्तुओं पर टैरिफ लगाए थे.

वित्तीय वर्ष 2018 में, कस्टम ड्यूटी से प्राप्त राशि $41.6 बिलियन थी और टैरिफ बढ़ाने के बाद वित्तीय वर्ष 2019 में, यह राशि $71.9 बिलियन थी.