सरस्वती नदी कहां से निकलती है, क्या अब भी कहीं दिखती है इसकी झलक? 

26 February 2025

लुप्त सरस्वती नदी वैदिक काल की सबसे पवित्र और शक्तिशाली नदी थी. माना जाता है कि सरस्वती नदी के किनारे ही हड़प्पा सभ्यता के स्थलों की खोज की गई है. (तस्वीर AI जेनरेटेड और प्रतीकात्मक है)

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इसरो के जियो पोर्टल भुवन के मुताबिक वैदिक सरस्वती नदी का उद्गम स्थल हिमालय था. यह वहीं से उत्पन्न हुई थी. (तस्वीर AI जेनरेटेड और प्रतीकात्मक है)

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यह नदी पश्चिम में सिंधु नदी और पूर्व में गंगा नदी के बीच पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी राजस्थान और गुजरात से होकर बहती थी. (तस्वीर AI जेनरेटेड और प्रतीकात्मक है)

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अंत में यह अरब सागर में कच्छ की खाड़ी में गिरती थी. वैदिक सरस्वती नदी जलवायु और टेक्टोनिक परिवर्तनों के कारण लगभग 5000 साल पहले लुप्त हो गई. (तस्वीर AI जेनरेटेड और प्रतीकात्मक है)

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ऐसा माना जाता है कि सरस्वती नदी अभी भी थार रेगिस्तान के नीचे बह रही है और इसका हिमालयी संपर्क जीवित है. (तस्वीर AI जेनरेटेड और प्रतीकात्मक है)

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इस लुप्त नदी के अवशेष रेत के आवरण के नीचे पैलियोचैनल के रूप में संरक्षित हैं. लेकिन इसकी झलक कहीं दिखाई नहीं देती. (तस्वीर AI जेनरेटेड और प्रतीकात्मक है)

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वेद, मनुस्मृति, महाभारत और पुराणों जैसे प्राचीन साहित्य में 'सरस्वती' नाम का इस्तेमाल किया गया है. (तस्वीर AI जेनरेटेड और प्रतीकात्मक है)

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वैदिक साहित्य में सरस्वती नदी का लगातार संदर्भ मिलता है.  सरस्वती के अलावा किसी अन्य नदी को इतना महत्व और सम्मान नहीं मिला है. (तस्वीर AI जेनरेटेड और प्रतीकात्मक है)

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ऋग्वेद में वैदिक सरस्वती को माताओं में सर्वश्रेष्ठ, नदियों में सर्वश्रेष्ठ, देवियों में सर्वश्रेष्ठ' के रूप में वर्णित किया गया है. (तस्वीर AI जेनरेटेड और प्रतीकात्मक है)

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यजुर्वेद में सरस्वती की पांच सहायक नदियां बताई गई हैं. इनमें दृषद्वती, सतुद्री (सतलज), चंद्रभागा (चिनाब), विपासा (व्यास) और इरावती (रावी)हैं.  ये सभी नदियां सिंधु सागर (अरब सागर) से मिलने के लिए सरस्वती में मिल जाती हैं.

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अथर्ववेद में उल्लेख है कि भगवान ने सरस्वती के तट पर रहने वाले लोगों को मीठे रसदार जौ प्रदान किए.  इससे पता चलता है कि वैदिक काल में सरस्वती की उपजाऊ मिट्टी पर  खेती की जाती थी. (तस्वीर AI जेनरेटेड और प्रतीकात्मक है)

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इसरो केंद्र वैदिक सरस्वती नदी के अधिकांश पुरावाहनों और वर्तमान हिमालयी नदियों के साथ उसके संबंधों को चित्रित करने में सक्षम हो सके हैं. (तस्वीर AI जेनरेटेड और प्रतीकात्मक है)

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वैदिक सरस्वती नदी के सटीक मार्ग और उसके स्रोत की खोज उचित वैज्ञानिक डेटाबेस के अभाव के कारण शोधकर्ताओं के बीच एक चुनौतीपूर्ण कार्य है. (तस्वीर AI जेनरेटेड और प्रतीकात्मक है)

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ऑप्टिकल और माइक्रोवेव डेटा के मल्टी-स्पेक्ट्रल और मल्टी-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह चित्रों का उपयोग करके रिमोट सेंसिंग और जीआईएस जैसे आधुनिक उपकरणों के माध्यम से इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश की गई.  (तस्वीर AI जेनरेटेड और प्रतीकात्मक है)

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