23 Feb 2024
भांग और गांजे का इस्तेमाल लोग नशा करने के लिए करते हैं. हालांकि, इनका प्रयोग आयुर्वेद में औषधि के तौर पर भी होता है.
Credit: Pixabay
भारत में आपको कई जगह भांग के सरकारी ठेके मिल जाएंगे लेकिन गांजे पर प्रतिबंद है.
Credit: Pixabay
भांग को पारंपरिक रूप से महा शिवरात्रि और होली के वसंत त्योहार के दौरान वितरित किया जाता है.
Credit: Pixabay
अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि भांग और गांजे में क्या अंतर है. आइए आपको बताते हैं.
Credit: Pixabay
दरअसल, भांग और गांजा दोनों एक ही पौधे से निकले हैं. इस पौधे को Cannabis Sativa कहा जाता है. हालांकि असल में कैनबीस को हिंदी में भांग ही कहते हैं.
Credit: Pixabay
इस पौधे को हिस्सों में बांटा जाए तो सबसे ऊपरी हिस्सा इसके फूल और फल का आता है. इसके बाद आती हैं पत्तियां. फिर तना और अंत में जड़.
Credit: Pixabay
सबसे ऊपर वाले पार्ट यानी पौधे के फल-फूल वाले हिस्से को सुखाकर गांजा तैयार किया जाता है.
Credit: Pixabay
यदि सूखने के बाद इसका तेल भी निकाल लिया जाए तो यह चरस बन जाता है.
Credit: Pixabay
जबकि इसके पत्तियों से भांग बनती है. इसके तने और जड़ों का इस्तेमाल इंडस्ट्रियल यूज के लिए किया जाता है. भारत में भांग की खेती पर प्रतिबंध है.
Credit: Pixabay
दरअसल, साल 1985 में भारत सरकार ने नार्कोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज (NDPS) अधिनियम के तहत देश में भांग की खेती को प्रतिबंधित कर दिया था.
Credit: Pixabay
लेकिन यही NDPS अधिनियम राज्य सरकारों को बागवानी और औद्योगिक उद्देश्य के लिए भांग की खेती की अनुमति प्रदान करने का अधिकार भी देता है.
Credit: Pixabay
एनडीपीएस ऐक्ट के मुताबिक ‘केंद्र सरकार कम टीएचसी मात्रा वाली भांग की किस्मों पर अनुसंधान और परीक्षण को प्रोत्साहित कर सकती है.
Credit: Pixabay
राज्य सरकार ने अनुमति मिलने के बाद ही कोई व्यक्ति भांग की खेती कर सकता है. इसका लाइसेंस लेना पड़ता और सरकारी कर्मचारी खेती का मुआयना भी करते हैं.
Credit: Pexels
केंद्र सरकार के अनुसार, भांग का उपयोग चिकित्सा, वैज्ञानिक, औद्योगिक और बागवानी उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है.
Credit: Pexels
चूंकि यह नैचुरली उगने वाला पौधा है और भारत में भारी मात्रा में भांग का इस्तेमाल भी किया जाता है, इसलिए भारत सरकार ने इसकी पत्तियों को कानून से बाहर रखा.
Credit: Pexels
AIIMS Delhi में 3 साल से अधिक समय तक कैनाबिस पौधे पर शोध कर चुके डॉ. अनिल शेखावत की राय में कैनाबिस के मनौवैज्ञानिक असर को देखते हुए पूरी पौधे को लीगल करना किसी भी देश के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.
Credit: Pexels
कैनाबिस पौधे के फल-फूल वाले में हिस्से में 2-10% तक की मात्रा में THC पाई जा सकती है. इसी हिस्से से गांजा तैयार होता है.
Credit: Pexels
इस कंपाउंड में Abuse Potential है यानी किसी भी कीमत पर बार-बार लेने पर लत लग सकती है.
Credit: Pexels
साइंस की दुनिया में इसे ही लेकर सबसे ज्यादा शोध होते हैं. इसी केमिकल कंपाउंड के कारण इसकी खेती को इससे जुड़े उत्पादों को बैन किया जाता है.
Credit: Pexels
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 15 नवंबर 2021 से आधिकारिक तौर पर भांग के बीज और भांग के बीज से बने उत्पादों को '0.3 प्रतिशत से कम THC' के रूप में प्रमाणित किया है.
Credit: Pixabay
सरकारी ठेके पर जो भांग मिलती है उनमें 0.3 टीएससी से ज्यादा नहीं हो सकता है इसके अलावा ठेके पर कैनबीस के पौधे से बना गांजा नहीं बेचा जा सकता है क्योंकि वह ज्यादा हानिकारक और लत लगा देने वाला होता है.
Credit: Pixabay
यही कारण है कि गांजे पर भारत में बैन लगा हुआ है और भांग का इस्तेमाल दवाइयों आदि में होता है.
Credit: Pexels