11 Jan 2025
जयपुर में स्थित हवा महल देश की खूबसूरत एतिहासिक धरोहरों में से एक है.
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हवा महल जयपुर के बड़ी चौपड़ पर स्थित है. इसका निर्माण 1799 में हुआ था. इसकी बाहरी दीवारों पर 953 खिड़कियां हैं.
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अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि हवा महल के अंदर क्या है इसका नाम हवा महल क्यों रखा गया.
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तो आइए आपको हवा महल के इतिहास में ले चलते हैं और बताते हैं कि इसके अंदर आखिर है क्या.
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दरअसल, 1799 में कछवाहा राजपूत शासक सवाई प्रताप सिंह ने लाल चंद उस्ता को रॉयल सिटी पैलेस को बढ़ाने का आदेश दिया था.
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उस समय औरतें पर्दे में रहती थीं और राजपूत शाही महिलाओं को अजनबियों द्वारा नहीं देखे जाने का प्रचलन था.
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इसलिए हवा महल को इस तरह डिजाइन किया गया कि बाहर से इसके अंदर का कुछ नहीं दिखे लेकिन खिड़कियों के अंदर से बाहर का नजारा देख सकें.
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उस जमाने की औरतें इन्हीं खिड़कियों से बाहर का नजारा देखा करती थीं. हवा महल के अंदर पांच मंजिल हैं.
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ऊपर की तीन मंजिलें एक कमरे के बराबर हैं जिनके नाम विचित्र मंदिर, प्रकाश मंदिर और हवा मंदिर हैं.
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हवा महल को कृष्ण के मुकुट के आकार में बनाया गया था क्योंकि सवाई प्रताप सिंह कृष्ण भगवान के भक्त थे.
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महाराजा विचित्र मंदिर में कृष्ण की पूजा करते थे जबकि प्रकाश मंदिर के दोनों तरफ खुली छतें बनी हुई हैं.
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ऊपरी मंजिलों पर जाने के लिए सीढ़ियां नहीं हैं, बल्कि रैंप हैं. वे शाही महिलाओं की पालकी के लिए हुआ करती थीं.
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गर्मियों के मौसम में भी यह महल अंदर से एकदम ठंडा रहता है. हर खिड़की के बाहर झांकने के लिए छेद है.
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