5 Nov 2024
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सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए यूपी मदरसा एक्ट 2004 को संवैधानिक करार दिया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे संविधान के खिलाफ और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन बताया था.
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को सामान्य स्कूलिंग सिस्टम में शामिल करने का आदेश दिया था.
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5 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को पलटते हुए इस एक्ट को संवैधानिक कहा है.
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हालांकि चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों के बेंच ने कहा है कि मदरसे मुंशी और मौलवी (10वीं क्लास) और आलिम (12वीं क्लास) की तालिम दे सकते हैं, लेकिन फाजिल और कामिल की नहीं.
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दरअसल, मदरसों में कई स्तर पर पढ़ाई कराई जाती है. कक्षा 1-5 तक तहतानिया (प्राइमरी बोर्ड), कक्षा 6-8 तक फौकानिया, कक्षा 10वीं तक मुंशी और मौलवी और कक्षा 12वीं तक पढ़ने वाले छात्र आलिम की पढ़ाई करते हैं.
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वहीं बीए तक पढ़ने वाले छात्रों को कामिल और पोस्टग्रेजुएट को फाजिल की डिग्री दी जाती है. कोर्ट ने कहा कि मदरसे फाजिल और कामिल की डिग्री नहीं दे सकते हैं, क्योंकि यह UGC अधिनियम के खिलाफ है.
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मुताल-ए-हदीस, मुताल-ए-मजाहिब, अरबी साहित्य (कामिल अरबी अभ्यर्थी हेतु), फारसी साहित्य (कामिल फारसी अभ्यर्थी हेतु), फुनूने अदब, बलागत व उरूज, सामाजिक अध्ययन पढ़ाया जाता है.
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इसके अलावा, मुताल-ए-फिक्ह इस्लामी (सुन्नी/शिया), मुताल-ए-उसूले फिक्ह (सुन्नी/शिया), जदीद अरबी अदब की तारिख (कामिल अरबी थर्ड ईयर), जदीद फारसी अदब की तारीख जैसे विषय होते हैं.
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मदरसों से पोस्टग्रेजुएट्स यानी एम.ए करने के बाद फाजिल की डिग्री दी जाती है जिसमें अरबी-फारसी और दीनियात आधारित विषय पढ़ाए जाते हैं. इसके अलावा डिप्लोमा कोर्स को 'कारी' कहा जाता है.
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बता दें कि यूपी में 25 हजार मदरसे हैं, जिनमें से लगभग 16 हजार को यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा से मान्यता मिली हुई है, जबकि करीब 8000 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त हैं.
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मान्यता प्राप्त मदरसों में 560 ऐसे हैं, जो एडेड हैं. यानी 560 मदरसों का संचालन सरकारी पैसों से होता है.
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फौकानिया तक 14677 मदरसों और आलिया (मुंशी, मौलवी,आलिम, कामिल, फाजिल) तक के 4536 मदरसों को मान्यता प्राप्त है.
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