जस्टिस संजीव खन्ना के वो पांच बड़े जजमेंट, जो हमेशा रखे जाएंगे याद

04 Nov 2024

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) 10 नवंबर को रिटायर होने जा रहे हैं. उनकी जगह अब सुप्रीम कोर्ट के सीनियर मोस्ट जज जस्टिस संजीव खन्ना भारत के मुख्य न्यायाधीश होंगे.

ऐसे में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दूसरे सबसे वरिष्ठ जस्टिस संजीव खन्ना को सीजेआई बनाने की सिफारिश केंद्र को भेजी है.

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जस्टिस संजीव खन्ना ने सुप्रीम कोर्ट में अपने समय के दौरान कई बड़े निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. आइए जानते हैं वो कौन-सी जजमेंट हैं.

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2019 के एक ऐतिहासिक फैसले में, जस्टिस खन्ना पांच-जजों की कॉन्स्टिट्यूशन बेंच का हिस्सा थे.

सूचना का अधिकार और ज्यूडिशियरी ट्रांसपेरेंसी:

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इस बेंच ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस निर्णय को बरकरार रखा, जिसमें भारत के चीफ जस्टिस के ऑफिस को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत लाने का निर्णय लिया गया था.

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जस्टिस खन्ना ने अनुच्छेद 370 को हटाने के सरकार के निर्णय का समर्थन किया था.

अनुच्छेद 370 हटाना:

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जस्टिस खन्ना ने अनुच्छेद 370 को हटाने के सरकार के निर्णय का समर्थन किया था.

इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम

संजीव खन्ना उस बेंच का हिस्सा भी थे जिसने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को असंवैधानिक करार दिया, यह कहते हुए कि यह सूचना के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती है. 

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जस्टिस खन्ना ने कहा कि गुमनाम डोनेशन के कारण चुनावी फंडिंग में पारदर्शिता की कमी होती है, इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती है.

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जस्टिस खन्ना कई फैसले चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी दिए. 

इलेक्शन इंटीग्रिटी और वोटर वेरिफिकेशन

उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) पर चुनाव आयोग के रुख को बरकरार रखा और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) स्लिप की 100% वेरिफिकेशन की याचिका को खारिज कर दिया.

इलेक्शन इंटीग्रिटी और वोटर वेरिफिकेशन