13 May 2024
Credit: Social Media
शेखर सुमन इन दिनों 'हीरामंडी' को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं. सीरीज में उनकी एक्टिंग और नवाबी अंदाज को काफी सराहा जा रहा है.
अब अपने एक लेटेस्ट इंटरव्यू में शेखर सुमन ने बताया है कि तवायफ और सेक्स वर्कर में काफी अंतर होता है. दोनों को एक ही कैटेगरी में नहीं रखा जा सकता.
शेखर सुमन ने कहा कि तवायफों को अक्सर गलत नजरिए से देखा जाता है. कई दफा उनको सेक्स वर्कर्स का टैग दे दिया जाता है.
रेडियो सिटी संग इंटरव्यू में शेखर सुमन ने कहा- यही समाज है, जिसने उन्हें ऐसा बना दिया है. शो में कई बार ये बताया गया है कि कोई भी महिला अपनी मर्जी से प्रोस्टीट्यूट नहीं बनती.
हालात कुछ महिलाओं को सेक्स वर्कर बनने पर मजबूर कर देते हैं. इन सबके बावजूद समाज में उनका बड़ा योगदान है.
शेखर सुमन ने आगे कहा- जहां से हम आते हैं, जिस तरह की भूख जो मर्दों में है, उसका असर वहां होता है, उस वजह से ही समाज बचा रहता है.
शेखर सुमन ने कहा कि पहले के दिनों में लोगों को 'हीरामंडी' भेजा जाता था, जो उनके लिए एक फिनिशिंग स्कूल ही तरह होता था. वहां उन्हें तहजीब, म्यूजिक, डांस, कविताएं और लव मेकिंग की कला सिखाई जाती थी.
'हीरामंडी' का योगदान काफी बड़ा था. वो एक इंस्टीट्यूशन था. लेकिन हमने हमेशा तवायफों को गलत नजर से देखा.
'हीरामंडी' में स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को भी दिखाया गया है, जो काफी अहम था. वरना वो गुमनाम, अनजन रहकर ही खत्म हो गए.