सुला जिसने देसी जुबान को लगाया वाइन का चस्का!
वाइन मेकिंग कंपनी सुला वाइनयार्ड्स (Sula Vineyards) इन दिन चर्चाओं में है.
सुला उन स्वदेसी ब्रांड में शुमार है, जिसने वाइन को आम भारतीय तक पहुंचाने का काम किया.
राजीव सामंत ने 1999 में सुला वाइनयार्ड्स की स्थापना की थी. उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की है.
भारत आने के बाद जब वह नासिक स्थित अपनी पैतृक जमीन देखने गए तो उन्हें वाइन इंडस्ट्री में कदम रखने का आइडिया आया.
दोस्तों से 5 करोड़ की रकम जुटाकर राजीव ने नासिक में अपनी 30 एकड़ में फैली पैतृक जमीन पर सूला वाइनयार्ड्स की नींव रखी.
राजीव की कामयाबी का ही असर था कि आने वाले वक्त में भारत में बहुत सारी अन्य वाइन कंपनियां भी अस्तित्व में आईं.
सुला नाम राजीव की मां सुलभा से प्रेरित है. आज सुला वाइनयार्ड 1800 एकड़ में है और यह एक से बढ़कर एक किस्म की वाइन बनाती है.
सुला को वाइन टूरिज्म बिजनेस को बढ़ावा देने का भी क्रेडिट दिया जाता है. नासिक स्थित कंपनी की वाइनरी में हर साल लाखों लोग घूमने जाते हैं.
कंपनी ने भारत में पहली बार कैन में बंद वाइन 2020 में पेश किया. सुला कंपनी बनाने में राजीव ने कैसे संघर्ष किया, जानने के लिए नीचे क्लिक करें.