28 Nov 2024
उम्र बढ़ने के साथ ही अर्थराइटिस की समस्या होने लगती है. अर्थराइटिस के मरीजों मरीजों को घुटनों, एड़ियों, पीठ, कलाई या गर्दन के जोड़ों में दर्द की शिकायत रहती है. ये बीमारी ज्यादातर बुजुर्गों में देखी जाती है. लेकिन खराब लाइफस्टाइल की वजह से युवा वर्ग भी इसकी चपेट में आ रहे है.
अर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी है जो जोड़ों में दर्द, सूजन और जकड़न का कारण बनती है.
आयुर्वेद में अर्थराइटिस की समस्या से निपटने के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं. आचार्य बालकृष्ण ने अर्थराइटिस की समस्या से निपटने के लिए एक ऐसे काढ़े के बारे में बताया है जिससे आपका सारा दर्द छूमंतर हो जाएगा.
आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि वरुण के फूल और कोमल पत्तियों को तोड़कर सुखाकर पाउडर बना लें. 3-3 ग्राम की मात्रा में पाउडर की चाय बनाकर सेवन करें. इससे पथरी या किडनी की समस्या ठीक हो जाती है.
यह रक्त शोधन में काम करेगी और रक्तशुद्धि में भी मदद करती है. इसके साथ ही यह मूत्र रोगों और गुर्दे से संबंधित समस्याओं को भी ठीक करने में फायदेमंद होती है.
वरुण के कोमल पत्तों को सुखाकर उसका पाउडर बना लें और रोजाना इसे पानी में उबालकर पीने से त्वचा संबंधी रोग खत्म हो जाते है.
अर्थराइटिस की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए भी यह काफी फायदेमंद होता है. इससे अर्थराइटिस में होने वाली सूजन और दर्द की समस्या दूर हो जाती है.
अर्थराइटिस से छुटकारा पाने के लिए इसकी पत्तियों को को नमक के में उबालकर सिकाई करते हैं या उबली हुई पत्तियों को सूजन वाली जगह पर बांधने से सूजन खत्म हो जाएगी.
अगर अर्थराइटिस की समस्या काफी ज्यादा बढ़ गई है तो वरुण की छाल व पत्तियों का काढ़ा बनाकर सेवन करने से अर्थराइटिस की समस्या दूर हो जाती है, लेकिन इसके साथ ही खानपान में परहेज भी करें.