प्रोटीन कोशिकाओं को सही से काम करने, टिश्यू का निर्माण करने, ब्लड को ऑक्सीजन सर्कुलेट करने, वेट लॉस करने, मसल्स रिपेयर और ग्रोथ करने में अहम भूमिका निभाता है.
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पिछले कुछ सालों में हाई प्रोटीन डाइट लेने का चलन काफी बढ़ गया है. अब चाहे वह प्रोटीन खाने से लिया जा रहा हो या फिर उसके लिए प्रोटीन सप्लीमेंट लिया जा रहा हो.
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प्रोटीन के कई सोर्स होते हैं जो वेजिटेरियन, नॉन-वेजिटेरियन या वीगन डाइट वालों के लिए उपयुक्त होते हैं. जैसे चिकन, मटन, दाल, पनीर, सोया चंक, मछली, दही, बीन्स, नट्स आदि.
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हॉवर्ड मेडिकल स्कूल के मुताबिक, आम तौर पर पुरुषों को रोजाना 56 ग्राम और महिलाओं के लिए 46 ग्राम प्रोटीन का सेवन करना ही चाहिए.
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अगर दूसरा अनुपात देखा जाए तो इंसान को अपने 0.8 ग्राम प्रतिकिलो बॉडीवेट के मुताबिक प्रोटीन लेना चाहिए. खाने की लगभग 10 प्रतिशत कैलोरी प्रोटीन से आनी चाहिए.
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पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलने से थकान, ब्रेन फॉग, मसल्स लॉस, भूख और चोट से धीमी रिकवरी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं.
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लेकिन वहीं दूसरी क्या आपने कभी सोचा है कि अगर कोई अधिक मात्रा में प्रोटीन ले लेगा तो क्या होगा?
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हॉवर्ड मेडिकल स्कूल का कहना है कि अगर कोई जरूरत से अधिक प्रोटीन ले रहा है तो उसे किडनी या किडनी स्टोन संबंधित समस्या हो सकती है.
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बहुत अधिक प्रोटीन खाना ज्यादातर लोगों के लिए कोई समस्या नहीं पैदा करता लेकिन अगर आप लंबे समय तक लगातार अधिक मात्रा में प्रोटीन खाते हैं, तो यह अंततः यह डाइजेशन, लिवर और किडनी पर अधिक प्रभाव डाल सकता है.
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हाई प्रोटीन डाइट जिसमें अधिक मात्रा में रेड मीट या सैचुरेटेड फैट होता है, उससे हार्ट डिसीज और पेट के कैंसर का खतरा अधिक हो सकता है. प्लांट बेस्ड हाई प्रोटीन से खतरा नहीं रहता.
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इस बात का जबाव देना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि इस बारे में हर एक्सपर्ट की राय अलग है.
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बताया जाता है कि औसत व्यक्ति के लिए 2 ग्राम प्रति किलो बॉडी वेट प्रोटीन लेना भी सही नहीं है. लेकिन उस कंडिशन में जब वह बॉडी बिल्डिंग या हैवी वर्कआउट ना कर रहा हो.
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सांस की दुर्गंध, भूख में कमी, वजन बढ़ना, कब्ज, दस्त, हल्की मतली या भोजन के बाद थकान अधिक प्रोटीन लेने के संकेत हो सकते हैं.
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प्रोटीन का सेवन करने से पहले आप अपने डॉक्टर से पता करें कि क्या आपको कोई किडनी संबंधित बीमारी तो नहीं जो इसे और खतरनाक बना सकती है. लीन प्रोटीन खाएं ना कि सैचुरेटेड फैट वाले फूड्स.
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