14 June 2024
Credit: Freepik
खुली आंखों से ख्वाब तो सब देखते हैं लेकिन कभी-कभी हम ख्वाबों की दुनिया में इतना खो जाते हैं कि असल जिंदगी से दूरी बना लेते हैं.
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दिन के उजाले में बैठे-बैठे अपने सपनों और फैंटेसी दुनिया में खो जाना ही डे-ड्रीमिंग है. आइए जानते हैं, ये स्थिति मेंटल हेल्थ के लिए कितनी सही है.
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रिसर्च के अनुसार, यह रचनात्मकता को बढ़ाने में मदद कर सकता है.यह समाधानों पर विचार करने और विभिन्न दृष्टिकोणों पर विचार करने की क्षमता बढ़ाता है.
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ये दिमाग को रिलेक्स करता है और तनाव से राहत दे सकता है. इससे रोजमर्रा की जिंदगी के प्रेशर से अस्थाई मुक्ति मिल सकती है.
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कभी-कभी डे-ड्रीमिंग अच्छी हो सकती है लेकिन इसका अत्यधिक या अनियंत्रित होना मानसिक स्वास्थ्य जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है.
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इससे वास्तविकता से अलग होने की भावना, जीवन के प्रति असंतोष और महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है.
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