12 August 2024
Credit: Freepik
वक्त के इस दौर में जब बातचीत का जरिया मैसेज और ईमेल पर निर्भर हो गया है, तो कई लोगों को फोन कॉल से एंग्जाइटी हो जाती है. ऐसे लोगों के लिए फोन पर बात करना मुश्किल काम लगता है.
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इसे फोन एंग्जाइटी या टेलीफोबिया कहा जाता है. ये बेहद आम है और इसे सोशल एंग्जाइटी का एक प्रकार कहा गया है. आइए जानते हैं, इसकी क्या वजह हो सकती हैं.
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आमने-सामने बात करने पर हमारी बॉडी लेंग्वेज, चेहरे के हाव-भाव, नजरों के इशारों के जरिए भी इंसान अपनी बात को बेहतर तरीके से कह पाता है. फोन पर बात करने पर इन सब संकेतों की कमी होती है, जिससे बात का गलत मतलब निकलने का डर बना रहता है.
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फेस टू फेस बात करने के बजाय फोन पर बात करने में मिस कम्यूनिकेशन का डर रहता है. फोन पर बात पसंद न करने वाले लोगों को ये डर रहता है कि कहीं ऐसा न हो कि उनकी बात का गलत मतलब निकाल लिया जाए.
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फोन कॉन पर एकदम जवाब देने का प्रेशर होता है जबकि मैसेज में आपके पास सोचने-समझने का वक्त होता है, ये बात भी लोगों को परेशान करती है.
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फोन पर बात के पुराने नकारात्मक अनुभव या अजीब सी चुप्पी जैसी कई वजह भी फोन कॉल एंग्जाइटी की वजह हो सकती हैं. आइये जानते हैं, इन्हें कैसे खत्म किया जा सकता है.
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कॉल से पहले अपनी बातों को तैयार करें. इससे आप महसूस करेंगे कि आपके पास कहने के लिए स्पष्ट बातें हैं.
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गहरी सांस लें और खुद को शांत करने के लिए कुछ तकनीकें अपनाएं, जैसे-मसल रिलेक्स, मेडिटेशन आदि.
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इस परेशानी को कम करने के लिए शुरुआत में छोटी कॉल करें, जैसे-फोन पर खाना ऑर्डर करना.
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अगर आपको लगता है कि आपकी एंग्जाइटी गंभीर है, तो मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से मदद लेना एक अच्छा विकल्प हो सकता है.
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