24 June 2024
एंग्जाइटी एक मेंटल हेल्थ प्रोब्लम है. किसी भी चीज को लेकर घबराहट होना और उस स्थिति में खुद पर आसानी से काबू ना कर पाना एंग्जाइटी के लक्षण होते हैं.
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मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, ज्यादातर लोगों को लगता है कि एंग्जाइटी मानसिक समस्याओं के कारण होती है, जबकि ऐसा नहीं है. कई बार एंग्जाइटी का कारण शारीरिक समस्याओं से भी जुड़ा होता है.
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ब्लड शुगर के लेवल में उतार-चढ़ाव एंग्जाइटी के लक्षणों को बढ़ा सकता है. जब शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बहुत कम हो जाता है तो शरीर स्ट्रेस हार्मोन रिलीज करता है, जिसके कारण एंग्जाइटी की समस्या बढ़ जाती है.
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शरीर में आयरन की कमी के कारण सेल्स में ऑक्सीजन ठीक से नहीं पहुंच पाती, जिसके कारण थकान, कमजोरी और सांस लेने में तकलीफ होती है. ये सभी लक्षण एंग्जाइटी को बढ़ाते हैं.
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एनीमिया होने पर दिमाग में ऑक्सीजन का लेवल कम हो जाता है, जिससे व्यक्ति को एंग्जाइटी महसूस होने लगती है.
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शरीर में प्रोजेस्टेरोन, एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन में उतार-चढ़ाव मूड में बदलाव और एंग्जाइटी का कारण बन सकता है. वहीं, महिलाओं में मेनोपॉज की स्थिति भी एंग्जाइटी को बढ़ा सकती हैं.
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हाइपरथायरायडिज्म की वजह से दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना और चिड़चिड़ापन होने जैसे लक्षण एंग्जाइटी को बढ़ा सकते हैं.
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शरीर में विटामिन बी12 की कमी होने से थकान, कमजोरी और मूड में बदलाव जैसे लक्षण नजर आते हैं, जो एंग्जाइटी की समस्या का कारण बन सकते हैं.
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कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट्स के कारण भी लोगों को एंग्जाइटी की समस्या हो सकती है. इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवाई नहीं लेनी चाहिए.
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