04 July 2024
Credit: Freepik
अगर आपको भी समय-समय पर खुद पर संदेह होने लगता है और दिमाग में ये सवाल आने लगते हैं कि क्या मैं ये कर सकता हूं तो ये मेंटल हेल्थ बिगड़ने की ओर इशारा करता है.
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इसके साथ ही कुछ अच्छा करके उसका क्रैडिट किस्मत या किसी और को देना भी इसी श्रेणी में आता है. ये स्थिति इम्पोस्टर सिंड्रोम हो सकता है.
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विशेषज्ञ का कहना है कि जो लोग अपनी कामयाबी का श्रेय अपनी योग्यता की जगह भाग्य हो देते हैं, वे इम्पोस्टर सिंड्रोम का शिकार होते हैं. ऐसे लोग हर पल सेल्फ डाउट से घिरे रहते हैं.
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जो इम्पोस्टर सिंड्रोम का शिकार होते हैं, उन्हें खुद पर विश्वास नहीं हो पाता है.वे खुद को अचीवर नहीं मानते है, जिसके चलते वे तनाव और एंग्ज़ाइटी का शिकार हो जाते हैं.
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ऐसे गोल्स और टारगेट्स को सेट करना, जो हकीकत में पूरे नहीं हो सकते हैं, इम्पोस्टर सिंड्रोम से ग्रस्त व्यक्ति का संकेत हैं. इससे उनकी फिजिकल, मेंटल और इमोशनल हेल्थ पर प्रभाव पड़ने लगता है.
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ये लोग अपनी कमियों के चलते खुद को कोसते रहते हैं. वे दूसरों को जीवन में अधिक महत्व देने लगते हैं और सेल्फ लव की भावना से दूर हो जाते हैं.
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पाजिटिविटी लाएं, कामयाबी का जश्न मनाएं. इससे कॉन्फिडेंस आता है और सेल्फ मोटिवेशन में काम आता है.
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फेलियर से निराश होने के बजाय उससे सीख लें और जीवन में बदलाव लाएं. इससे कामयाबी हासिल करने में मदद मिलेगी.
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