सर्दियों का मौसम कई लोगों को बेहद पसंद होता है तो कई लोगों के लिए ये उदासी का दूसरा नाम होता हैं.
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सर्दियों में कुछ लोगों का किसी काम में मन नहीं लगता और उदासी उन पर हावी होने लगती है और हल्के-हल्के दिन-रात गुजरने मुश्किल होने लगते हैं.
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अगर आपके साथ भी ऐसा होता रहता है तो आप विंटर डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं. इस स्थिति को सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर कहते हैं.
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दरअसल, सर्दियों में सूरज की रौशनी में कमी आ जाती है और कई बार तो कुछ दिन तक सूरज नजर ही नहीं आता. ऐसी स्थितियां डिप्रेशन की वजह बनती हैं.
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भारत में हर साल बड़ी तादाद में लोग विंटर डिप्रेशन के शिकार होते हैं. इस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि सुबह की रोशनी दिमाग के जागने और अलर्ट रहने के लिए बहुत जरूरी है.
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हमारे दिमाग से स्ट्रेस हॉर्मोन कॉर्टिसॉल निकलता है जो हमें जागने और अलर्ट रहने के लिए तैयार करता है. सुबह की धूप से हेल्दी कॉर्टिसॉल मिलता है जो डिप्रेशन से बचाता है.
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सुबह की धूप से हैप्पी हॉर्मोन डोपामाइन भी रिलीज होता है जो खुशी का एहसास देता है और मोटिवेट रहने में हमारी मदद करता है.
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डिप्रेशन से बचने के लिए कुछ देर धूप में जरूर बैठें. सर्दियों में धूप ठंड के साथ-साथ मानसिक सेहत भी बेहतर करती है.
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अपने घर में सुबह की धूप को आने दें. धूप विटामिन डी की कमी को तो दूर करेगी ही, साथ ही ये सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर के लक्षणों में थकान, चिड़चिड़ापन, सुस्ती और मूड में बदलाव में भी सुधार करेगी.
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