आज के वक्त में ज्यादातर लोग खुद को तनाव से ग्रस्त पाते हैं. इससे लोगों के जीवन में खुशियां गायब होती जा रही हैं.
कभी-कभी तनाव से घिरना आम है, लेकिन अगर आप लगातार परेशान रहते हैं और खुद को तनाव में पाते हैं तो आपको सतर्क रहने की जरूरत है.
लगातार तनाव और परेशानियों से घिरे रहना आपको एंग्जाइटी की ओर ले जाता है और अगर समय रहते इसकी ओर ध्यान ना दिया जाए तो आप एंग्जाइटी अटैक का शिकार हो सकते हैं.
हर वक्त खुद को परेशान पाना, चाहकर भी लोगों के साथ घुलने मिलने में परेशानी होना एंग्जाइटी की निशानी है. इस स्थिति में बैचेनी के साथ नकारात्मक विचार, चिंता और डर व्यक्ति को घेर लेते हैं. वहीं, एंग्जाइटी अटैक में कई और लक्षण व्यक्ति में नजर आने लगते हैं.
एंग्जाइटी अटैक में व्यक्ति इस हद तक निगेटिव विचारों से घिर जाता है कि बेचैनी होने लगती है. दिल की धड़कन बढ़ने लगती है. कई बार व्यक्ति को लगता है कि उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है. व्यक्ति को सिरदर्द और चक्कर आने जैसे लक्षण महसूस होते हैं.
कई बार व्यक्ति को लगने लगता है कि उन्हें दिल की बीमारी हो गई है या उन्हें कोई बड़ी शारीरिक समस्या हो गई है, लेकिन आपको बता दें ये लक्षण एंग्जाइटी अटैक के होते हैं.
अगर एंग्जाइटी अटैक का सही वक्त पर इलाज ना किया जा तो ये डिप्रेशन का कारण बन सकता है. आइए जानते हैं कैसे करें एंग्जाइटी अटैक का सामना.
एंग्जाइटी अटैक से निपटने के लिए सबसे जरूरी है कि आप पहले उन कारणों को खोजें जिसके चलते आपको तनाव महसूस हो रहा है.
एक बार जब आपने अपने स्ट्रेस का कारण पता कर लिया है तो अब उस परेशानी को दूर करने का साहस पैदा करें. अपनी परेशानी को नजरअंदाज करने की बजाए आपको अपने परेशानी से निपटने का साहस होना चाहिए.
जब आप एंग्जाइटी और एंग्जाइटी अटैक जैसी परेशानी झेल रहे होते हैं तब आपको किसी से मिलने-जुलने का मन नहीं होता है, लेकिन आपको लोगों से ना चाहते हुए भी मिलना-जुलना चाहिए. जब आप लोगों से मिलेंगे तो आपको अच्छा लगेगा.
वहीं, आपको अपने बेहद करीबी लोगों से अपनी परेशानी साझा करनी चाहिए. ऐसा करके आप हल्का महसूस करेंगे और समस्या से डील कर पाने का साहस खुद में ला पाएंगे.
हालांकि, अगर एंग्जाइटी अटैक के लक्षण लगातार हैं तो आपको किसी मनोचिकत्सक की मदद लेनी चाहिए.
इसके अलावा, आपको अपनी जीवनशैली में योगा या किसी तरह का वर्कआउट भी शामिल करने की जरूरत है.