यारशागुंबा को कीड़ा जड़ी के नाम से भी जाना जाता है. यह हिमालय में पाई जाने वाली बेहद ही दुर्लभ जड़ी बूटी है.
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यह मशरूम की तरह होती है और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाती हैं. यारशागुंबा को हिमालयन वियाग्रा भी कहा जाता है.
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यह एक खास कीड़े की इल्लियों यानी कैटरपिलर्स को मारकर उसके ऊपर पनपता है. जिस कीड़े के कैटरपिलर्स पर यह उगता है उसे हैपिलस फैब्रिकस कहते हैं.
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भारत के पिथौरागढ़, चमोली और बागेश्वर के अलावा यह नेपाल, चीन और भूटान में हिमालय और तिब्बत के पठारी इलाकों में मिलती है.
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दशकों से इस जड़ी बूटी का इस्तेमाल चाइनीज और तिब्बती दवाओं में किया जाता रहा है. इस बूटी का इस्तेमाल स्टेमिना को बढ़ाने के लिए किया जाता था.
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यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है. जिससे शरीर इंफेक्शन से आसानी से लड़ पाता है.
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इसमें कई ऐसी प्रॉपर्टीज पाई जाती हैं जिसके चलते यह फिजिकल और मेंटल स्ट्रेस को कम करता है और एनर्जी लेवल को बढ़ाता है.
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यह शरीर में ऑक्सीजन का बेहतर अवशोषण करता है. इससे थकान कम होती है और फिजिकल परफॉर्मेंस में सुधार होता है.
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फेफड़ों के लिए इसे काफी अच्छा माना जाता है. इससे शरीर में ऑक्सीजन का इंटेक बढ़ता है और स्टेमिना में भी सुधार होता है.
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