1 Apr 2025
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'खड़े होकर पानी मत पियो, घुटने में पानी भर जाएगा.' ये कहावत लगभग हर किसी ने सुनी ही होगी. फिर वहीं कुछ लोगों ने कहा कि खड़े होकर डाइजेशन पर असर पड़ता है तो लोगों ने उसे भी सच मानना शुरू कर दिया.
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कहा गया कि खड़े होकर पानी पीने से शरीर में पानी जाने की गति बढ़ जाती है जो किसी न किसी तरह से हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.
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अब जैसे ही कई लोग पानी पीते हैं तो वो गिलास लेकर बैठ जाते हैं ताकि बैठकर पानी पी सकें. इस मिथ की सच्चाई क्या है, इस बारे में आज हम आपको बताते हैं.
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इस दावे पर अलग-अलग विचारधाराएं हैं. आयुर्वेद कहता है कि खड़े होकर पानी पीने से पाचन तंत्र प्रभावित होता है क्योंकि खड़े होकर पानी पाने से वो बहुत ज्यादा ताकत और तेजी से शरीर में प्रवेश करता है और पेट में गिरता है.
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तेजी से शरीर में प्रवेश करने से तरल पदार्थों का संतुलन बिगड़ जाता है और अपच की समस्या होती है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का कहना है कि इंसान के शरीर को पानी के फायदे तभी मिलते हैं जब वे इसे बैठकर पीते हैं.
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आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि खड़े होकर पानी पीने से जोड़ों के क्षेत्रों में पानी जमा हो जाता है, जिससे गठिया की समस्या हो जाती है.
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खड़े होकर पानी पीने से शरीर में तरल पदार्थ का संतुलन बिगड़ जाता है और विषाक्त पदार्थों का संचय बढ़ जाता है जिससे गठिया की समस्या शुरू हो जाती है.
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स्वास्थ्य संबंधी दावों, तथ्यों और मिथकों के बारे में सही जानकारी देने वाले डॉ. एबी फिलिप्स का कहना है, 'खड़े होकर या बैठकर पानी पीने में कोई समस्या नहीं है. लेटकर पानी न पिएं क्योंकि इससे एस्पिरेशन (सांस की नली में चला जाना) हो सकता है.'
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डॉ फिलिप्स बताते हैं, 'मैं आपको बताता हूं कि जब पानी पिया जाता है, अब ऐसे में चाहे आप खड़े हों, बैठे हों या अपनी आंखें बंद या खोलकर रखें. पेट की दीवार के माध्यम से पानी मुख्य रूप से छोटी आंत में तेजी से अवशोषित होता है.'
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'अवशोषित पानी को फिर शरीर के फ्लुड कंटेनर्स में भेजा जाता है. कुल पानी का 66 प्रतिशत इंट्रासेल्युलर फ्लुड में, 25.5 प्रतिशत अंतरालीय फ्लुड में और 8.5 प्रतिशत सर्कुलेशन ब्लड वॉल्यूम में वितरित हो जाता है.'
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'इसके बाद पानी का निष्कासन किडनी के माध्यम से होता है, जहां फिल्टर किए गए पानी के हिस्से को हाइली रेग्युलेटेड मैकेनिज्म द्वारा पुन: अवशोषित किया जाता है.'
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'इसके बाद पानी का निष्कासन किडनी के माध्यम से होता है, जहां फिल्टर किए गए पानी के हिस्से को हाइली रेग्युलेटेड मैकेनिज्म द्वारा पुन: अवशोषित किया जाता है. इसलिए घुटने खराब होने का सवाल ही पैदा नहीं होता. यह एक मिथक है.'
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