दही सदियों से भारतीयों के मुख्य व्यंजन में शामिल रहा है जिसे अक्सर भोजन के साथ शरीर को ठंडक पहुंचाने के लिए खाया जाता है.
प्रोबायोटिक्स, कैल्शियम और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर दही पाचन में सहायता करने और पेट के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है.
दही के नियमित सेवन से पाचन में सुधार होता है, हड्डियां मजबूत होती हैं और इम्युनिटी तेज होती है.
हालांकि इसके प्रभाव आपकी पर्सनल हेल्थ कंडीशन, गट हेल्थ और डाइट पैटर्न जैसे फैक्टर्स के आधार पर अलग हो सकते हैं लेकिन आमतौर पर दोपहर के समय हर कोई इसे जरूर खाता है.
ऐसे में इस खबर में हम आपको बताएंगे कि शरीर पर वास्तव में इसका प्रभाव क्या पड़ता है?
दोपहर में दही के रोज सेवन से पेट के गुड बैक्टीरिया की संरचना में काफी बदलाव आ सकता है क्योंकि इसमें पेट के लिए हेल्दी और जरूरी प्रोबायोटिक्स होते हैं.
खासकर लैक्टोबैसिलस और बिफिडोबैक्टीरियम स्ट्रेन. ये गुड बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं और एंटरोबैक्टीरिया और स्टैफिलोकोकस जैसे हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करते हैं.
दही में मौजूद लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया पेट को मजबूत करते हैं और सूजन को कम करते हैं.
हालांकि दही में प्रोबायोटिक्स और जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं लेकिन यह हर किसी के लिए उतना भी अच्छा नहीं है. अगर आप लैक्टोज इनटॉलरेन्ट हैं तो बिना डॉक्टर की सलाह पर इसे ना खाएं.
दही का अधिक सेवन पाचन संबंधी परेशानी भी पैदा कर सकता है और वजन बढ़ाने में भी योगदान दे सकता है. इसके अलावा दही से कैल्शियम का अत्यधिक सेवन शरीर में आयरन और जिंक के अवशोषण को धीमा कर सकता है.
इस खबर में बताई गई चीजें सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर करें.