08 JAN 2025
बच्चे गीली मिट्टी की तरह होते हैं जिन्हें कुम्हार यानी माता-पिता और टीचर्स मिलकर जैसा आकार देते हैं, वो उसी में ढल जाते हैं. पैरेंट्स को चाहिए कि वो अपने बच्चे को सही उम्र में सही बातें सिखा दें.
Credit- Meta AI
छोटे बच्चों को टीनएज यानी 13 साल की उम्र से पहले ही कुछ बातें सिखा देनी चाहिए जिससे वो जिंदगी के हर कदम पर सफलता का स्वाद चखें और अगर कभी विफल भी हों तो हिम्मत न हारें और मेहनत करते रहें.
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बच्चों को सिखाएं कि वो अपना कमरा खुद से साफ करें और चीजें सलीके से रखें. इससे उनमें जिम्मेदारी का भाव आता है. उन्हें बेड लगाना, चीजों को साफ करना और कमरे में डस्टिंग करना सिखाएं.
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छोटे बच्चों को वॉशिंग मशीन यूज करना सिखाएं. कपड़े धोते वक्त उनसे मदद लें और धीरे-धीरे खुद अपने कपड़े धोना सिखाएं. उन्हें सूखे हुए कपड़ों को फोल्ड करने के लिए भी कहें.
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अपने बच्चे को सैन्डविच, अंडे, चावल जैसी आसान चीजें बनाना सिखाएं. इससे बच्चे में खुद में विश्वास बढ़ता है और वो समझ पाते हैं कि अपना ख्याल कैसे रखना है.
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बच्चे को बर्तन धोना सिखाएं. कम से कम बच्चा जिस प्लेट में खा रहा है, वो उसे साफ कर दे. इससे बच्चे में अपना काम खुद करने और सफाई की भावना बढ़ेगी.
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कई बच्चों की आदत होती है कि वो कहीं भी कचरा फैला देते हैं, छिलका या रैपर कहीं भी फेंक देते हैं. उनमें आदत डालें कि वो कचरे को डस्टबिन में ही डालें. अगर कहीं बाहर हैं तो कचरा सड़क पर फेंकने के बजाए अपने पास रखें और डस्टबिन दिखने पर ही उसे फेंके.
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बच्चे को पैसे की अहमियत समझाएं और बताएं कि पैसे बुद्धिमानी से खर्च करने चाहिए. उन्हें पॉकेट मनी दें और उन्हें सिखाएं कि पॉकेट मनी कहां खर्च करनी है और पैसे कैसे बचाने हैं.
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बच्चे को लाइट का बल्ब बदलना, पौधों को पानी देना और स्क्रू टाइट करना सिखाएं जिससे उनमें किसी भी समस्या का समाधान निकालने की कला विकसित हो.
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बच्चे को टाइम मैनेजमेंट सिखाएं जिससे वो अपने सभी काम समय पर पूरे करे. उसे डेडलाइन पूरे करना सिखाएं जो उसके बाद के जीवन में भी काम आएगा.
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