'वॉक करना कोई कसरत नहीं'... डॉक्टर्स ने बताया क्या है सही एक्सरसाइज

भारत में पिछले कुछ सालों के अंदर लोगों में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ी है जिसके पीछे खानपान की आदतों में बदलाव, बाहर के खाने का ट्रेंड और फिजिकल एक्टिविटी में कमी जैसे कई कारण हैं.

मोटापा अपने आप में एक बड़ी बीमारी है जो और भी कई बड़ी और खतरनाक बीमारियों को जन्म देता है.

हाल ही में हुए एजेंडा आजतक 2024 के दूसरे दिन 'दिल, जिगर, जान' सत्र में जाने-माने लिवर स्पेशलिस्ट डॉक्टर एस. के. सरीन और मेदांता हॉस्पिटल के अध्यक्ष और मशहूर हार्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर नरेश त्रेहान शामिल हुए थे. 

इस दौरान उन्होंने भारतीयों के खानपान,  हेल्थ, डाइट और एक्सरसाइज समेत कई चीजों पर बात की. उन्होंने कहा कि लोग पार्क में सैर और चहलकदमी को एक्सरसाइज मान बैठते हैं जो गलत है. 

डॉ. त्रेहान ने बताया कि स्वस्थ रहने के लिए हर किसी को तेज चलना चाहिए जिसे हम जॉकिंग (वॉक+जॉगिंग) कहते हैं. ये कुछ ऐसी होनी चाहिए जिसमें आप इतने तेज चल रहे हों कि चलते-चलते आप भागना शुरू कर दें. 

वो कहते हैं कि एक्सरसाइज का मतलब है जिसमें आपका पसीना बहे और आपसे उस दौरान बात करना मुश्किल हो.

डॉ. सरीन ने भी यही चीज दोहराते हुए कहा कि वॉकिंग कोई एक्सरसाइज नहीं है. एक्सरसाइज का मतलब थोड़ा-बहुत पसीना आना है. 

वो कहते हैं, वॉक एक वॉर्म अप की तरह है. रियल एक्सरसाइज को हम  मेटाबॉलिक इक्विवेलेंट (MET) से मापते हैं. इसे हम ऐसे समझ सकते हैं कि आप रेस्ट कर रहे हैं तो उस समय आपका शरीर जो ऊर्जा जला रहा है, उसकी MET कैटेगरी 1 है.

अगर आप ब्रिस्क वॉक कर रहे हैं तो उसकी MET कैटेगरी 3 है लेकिन अच्छी एक्सरसाइज वो है जिसमें आपको पसीना आ जाए तो उसकी कैटेगरी 6 है. हालांकि ये व्यक्ति की उम्र और हेल्थ कंडीशन पर भी डिपेंड करता है.

सरीन के अनुसार, 'इसके अलावा इससे भी बढ़िया एक्सरसाइज का उदाहरण ये है कि जो डॉक्टर त्रेहान कहते हैं कि आप इतने थक और हाफ जाएं कि आपके लिए एक्सरसाइज के दौरान बोलना मुश्किल हो. ये 12 MET कैटेगरी है जो बेस्ट है.'

लेकिन सबसे जरूरी है कि कुछ शुरू करें. पहले तो वॉक की आदत डालें, फिर उसे ब्रिस्क वॉक में बदलें और फिर रनिंग या जॉगिंग करना शुरू कर दें. 

डॉक्टर त्रेहान ने मसल मास मेंटेन रखने के लिए वेट लिफ्टिंग और पिलाटे को काफी मददगार बताया. इसके अलावा उन्होंने योग और सूर्य नमस्कार करने पर भी जोर दिया.