24 Jan 2025
रिपोर्ट: संजय शर्मा
महाकुंभ में सूर्यास्त होते ही संगम नगरी में रोशनी के फव्वारे फूट पड़ते हैं, जो शहर को शीतल और रंगीन चादर से ढक देते हैं.
Photo: Aajtak
शाम होते ही रंग-बिरंगी लाइटिंग और झिलमिलाती रोशनी का मनमोहक दृश्य हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है.
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महाकुंभ में शाम के बाद होने वाले भजन-कीर्तन और भक्ति संगीत की मधुर ध्वनियां संध्या को और भी दिव्य और पवित्र बना देती हैं.
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यहां बहती रसधार के बीच सुबह से लेकर आधी रात तक चलने वाले भंडारों में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं.
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साधु और संत देशभक्ति गीतों पर थिरकते और भक्ति में लीन नजर आते हैं.
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दिन में धूप रहने के बाद रात होते ही कुंभ नगरी शीतल चादर ओढ लेती है और एक अनोखे से सुकून का अनुभव कराती है.
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संगम नगरी की यह भव्यता और दिव्यता हर किसी को जीवनभर याद रहने वाला अनुभव प्रदान करती है.
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शाम को रासलीला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां संगम नगरी को भक्ति और आनंद से भर देती हैं.
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विभिन्न पंडालों में रामकथा, शिवपुराण और भक्तमाल की कथाएं श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती हैं.
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