24 Jan 2025
By Aajtak.in
आल्हा-ऊदल के गुरु संत अमरा की समाधि संभल के अमरपति खेड़ा गांव में मिली है. यह स्थल 1920 से भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) द्वारा संरक्षित है.
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संभल की एसडीएम वंदना मिश्रा ने बताया कि अमरपति खेड़ा 1920 से ही ASI संरक्षित रहा है. उसी जगह पर टीम ने निरीक्षण किया है.
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उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान कुछ बर्तन और पुराने सिक्के मिले हैं. लोगों ने कहा कि वहां पर पुरानी समाधियां रही हैं. वह ASI के रिकॉर्ड में भी है.
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जब उस जगह को ASI ने संरक्षित किया था तो वहां पर गुरु अमरा की समाधि थी. गुरु अमरा सम्राट पृथ्वीराज चौहान के समकालीन माने जाते हैं.
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एसडीएम ने बताया कि खुदाई के दौरान अभी तक मौके से 300 से 400 पुराने सिक्के मिले हैं. इसमें कुछ सिक्के ब्रिटिश और उससे भी पुराने समय के हैं.
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आल्हा-ऊदल का नाम पृथ्वीराज चौहान के समकालीन वीरों में लिया जाता है. महोबा के कीरत सागर मैदान में हुए युद्ध ने उन्हें अमर कर दिया.
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इतिहासकारों के मुताबिक, पृथ्वीराज चौहान ने राजकुमारी चंद्रावल को पाने और पारस पथरी व नौलखा हार लूटने के इरादे से चंदेल शासक राजा परमाल देव के राज्य महोबा पर चढ़ाई की थी.
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युद्ध महोबा के कीरत सागर मैदान में हुआ था, जिसमें आल्हा-ऊदल की तलवार की धार के आगे वह टिक न सके. आल्हा-ऊदल की वीरगाथा के प्रतीक कजली मेले को 'विजय उत्सव' के रूप में मनाने की परम्परा आज भी है.
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संभल की बात करें तो अमरपति खेड़ा में संत अमरा की समाधि के पास राम, सीता और लक्ष्मण की आकृति वाले सिक्के और प्राचीन वस्तुएं भी मिलीं हैं.
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