21 March 2024
हर साल मार्च 21 को वर्ल्ड पोएट्री डे'के रूप में मनाया जाता है. साल 1999 में UNESCO ने अपनी 30वीं जनरल कॉन्फ्रेंस में 'वर्ल्ड पोएट्री डे' की शुरुआत की थी.
इसका मक़सद दुनिया की तमाम तरह की ज़ुबानों और तहज़ीबों को बचाकर रखना और किसी की क़लम से पोएट्री के रूप में निकले उसके व्यक्तिगत हुनर को अपनाना है.
आज इस खास मौके पर हम आपके लिए लेकर आए हैं कुछ दिग्गज कवियों की कविताओं की पंक्तियां. क्या आप पंक्ति पढ़कर पहचान पाएंगे कवि का नाम?
मैं मधुबाला मधुशाला की, मैं मधुशाला की मधुबाला! मैं मधु-विक्रेता को प्यारी, मधु के धट मुझ पर बलिहारी, प्यालों की मैं सुषमा सारी, मेरा रुख देखा करती है मधु-प्यासे नयनों की माला। मैं मधुशाला की मधुबाला!
हरिवंश राय बच्चन
जेठ हो कि हो पूस, हमारे कृषकों को आराम नहीं है छूटे कभी संग बैलों का ऐसा कोई याम नहीं है मुख में जीभ शक्ति भुजा में जीवन में सुख का नाम नहीं है वसन कहां? सूखी रोटी भी मिलती दोनों शाम नहीं है
रामधारी सिंह दिनकर
स्नेह-निर्झर बह गया है !... स्नेह-निर्झर बह गया है ! रेत ज्यों तन रह गया है !
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
यह मन्दिर का दीप इसे नीरव जलने दो रजत शंख घड़ियाल स्वर्ण वंशी-वीणा-स्वर, गये आरती वेला को शत-शत लय से भर, जब था कल कंठो का मेला, विहंसे उपल तिमिर था खेला,
महादेवी वर्मा
देखो कोयल काली है पर, मीठी है इसकी बोली, इसने ही तो कूक कूक कर, आमों में मिश्री घोली। कोयल कोयल सच बतलाना, क्या संदेसा लायी हो?
सुभद्रा कुमारी चौहान