'नजर नीची करके बात करो...', प्रेमानंद महाराज ने अनिरुद्धाचार्य को क्यों दी ये सलाह

29 Jan 2025

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कथावाचक डॉ. अनिरुद्धाचार्य महाराज का जन्म 27 सितंबर 1989 को मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर से 9 किलोमीटर की दूर रेवझा नाम के गांव के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था.

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हाल ही में अनिरुद्धाचार्य महाराज प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए अपनी पत्नी और दोनों बेटों के साथ पहुंचे. 

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प्रेमानंद महाराज ने उन्हें सीख देते हुए कहा, 'सात्विक प्रवृत्ति से यदि यश प्रवृत्ति बढ़ रही तो कोई हानि की बात नहीं. लेकिन यदि यश थोड़ा भी गिर कर के बढ़ रहा है तो वो यश सम्मान नहीं होता.' 

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'यश वही सम्मान नहीं होता है जो धर्म के अनुसार और गौरव के अनुसार बढ़ता है. तो आप गौरव वान बनिए और धर्म निष्ठ बनिए जो आपके जीवन को आगे और और प्रकाशित करे.' 

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'कोई सहयोगी नहीं है. पहला शब्द याद कर लो. जिसे तुम सहयोगी समझ रहे हो वही तुम्हें नीचा दिखाने की कोशिश करेगा.'

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'आपको अगर उन्नति शल बहुत समय तक टिके रहना है धर्म क्षेत्र में तो, आपको अपने पैरों के बल खड़े होना पड़ेगा. इसके लिए आपको परिपक्व रहना होगा. स्वयं परिपक्व रहना होगा.'

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'यश बढ़ने में वर्षों लगते हैं, धूमिल होने में दो मिनट लगते हैं. दो मिनट में सब चौपट हो जाता है इसलिए जो भगवान ने आपको यश दिया है, पवित्रता दी है, उसका आप संयम से निर्वाह कीजिए.' 

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'भगवान ने अर्धांग में विराजमान (पत्नी) कर दिया, इसके सिवा कभी दृष्टि नहीं डालनी. नजर नीची करके बात करो.' 

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'उत्तर दिया खत्म. किसी से किसी तरह का लगाव ना होने पावे, तो कभी जीवन में तुम्हें कोई गिरा नहीं सकता.' 

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