17 Nov 2024
AajTak.In
चाणक्य को भारत का महान अर्थशास्त्री और विद्वान माना गया है. चाणक्य ने अपनी नीति शास्त्र में जीवन की समस्याओं और उनके उन्मूलन बताए हैं.
चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में कुछ लोगों को नाग से ज्यादा जहरीला बताया है. आइए चाणक्य के इस कथन को विस्तार से समझते हैं.
चाणक्य नीति में एक श्लोक है- दुर्जनेषु च सर्पेषु वरं सर्पो न दुर्जनः। सर्पो दंशति कालेन दुर्जनस्तु पदे-पदे.॥ इस श्लोक में सांप को दुष्ट आदमी से बेहतर बताया है.
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इस श्लोक का अर्थ है- दुष्ट और सांप में अंतर देखें तो इन दोनों में सांप बेहतर है, क्योंकि सांप एक बार ही डसता है. लेकिन दुष्ट आदमी कदम-कदम पर डसता है.
चाणक्य ने इस श्लोक में यह समझाने की कोशिश की है कि व्यक्ति को अपने दोस्त और सहयोगी बनाने से पहले उनके व्यवहार के बारे में जान लेना चाहिए.
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यदि आप एक बार किसी दुष्ट इंसान की संगत में आ गए तो आपका पूरा जीवन तबाह हो सकता है. भविष्य में आप किसी संकट में फंस सकते हैं.
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अगर आप यह सोचकर उसे माफ कर देते हैं कि आने वाले समय में ठीक हो जाएगा या फिर अपनी हरकतों पर लगाम लगा लेगा, तो ऐसा सोचना आपकी भूल है.
दुष्ट व्यक्ति की प्रवृत्ति में कभी बदलाव नहीं आता है. वह किसी न किसी तरह से आपको छोटा या फिर बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे आदमी से हमेशा दूर रहें.
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