03 Dec 2024
By- Aajtak.in
आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में ऐसे पुत्र का वर्णन किया है जो समाज में अपने घर-परिवार का खूब नाम रोशन करता है.
चाणक्य के अनुसार, ऐसा पुत्र जिस घर में होता है वहां हमेशा खुशहाली बनी रहती है. घर में हमेशा सकारात्मक माहौल रहता है.
आचार्य चाणक्य के अनुसार, पुत्र हमेशा गुणवान होना चाहिए. गुणवान पुत्र अपने घर को स्वर्ग समान बना देता है.
आचार्य चाणक्य के कथन में स्वर्ग प्राप्ति का अर्थ है सुखों की प्राप्ति होना. जिस घर में ऐसा पुत्र होता है वहां माता-पिता सुखी रहते हैं.
जिंदगी में हर एक पिता की चाहत होती है कि उसका पुत्र गुणवान और सदाचारी हो, यही पिता के लिए सबसे बड़ा सुख भी होता है.
आचार्य चाणक्य के अनुसार, जिस परिवार में गुणवान पुत्र होता है उस परिवार का समाज में खूब सम्मान भी किया जाता है.
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि बेटे का गुणवान होना बचपन में मिली पिता की शिक्षा पर ही निर्भर भी करता है.
हर एक पिता को अपने पुत्र को सदाचारी, गुणवान और विद्वान बनाना चाहिए. अगर कोई ऐसा नहीं करता है तो वह पिता शत्रु समान है.
आचार्य चाणक्य के अनुसार, पिता का कर्तव्य है कि अपने बेटे को सभी तरह की विद्याओं में पारंगत बनाए.